Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita ambar ka dheraj tut gaya by anita sharma

कविता  आज धरती का दुख देख-देख। अम्बर का धीरज टूट गया। भीग गयी अंखिया अम्बर की। बरस गये अश्रु बादल …


कविता 

kavita ambar ka dheraj tut gaya by anita sharma

आज धरती का दुख देख-देख।

अम्बर का धीरज टूट गया।

भीग गयी अंखिया अम्बर की।

बरस गये अश्रु बादल बनकर।

हुआ दुखी तब मिलन धरा का।

अपने अम्बर के आलिंगन में।

संताप अहा ! दोनो को था ।

मनुज टूट बेहाल जो था ।

सुबक दुखित दोनो ही थे ।

विकराल रूप से अशक्त सभी।

अलग-अलग थे सभी लोग यहाँ ।

कोई भी मिलकर दुख न बाँट सका।

ऐसी विपदा से टूटा हृदय ।

बिन बुलाई आपदा घिर आयी।

कैसे धीरज देता अम्बर-धरा को।

खुदका धीरज ढह गया आज।

कितनी लाशों से धरा दबी।

कितनी आहो को सहती ।

द्रवित नेत्रो से अम्बर-धरती को देख रहा।

कितने असहाय से विध्वंस को झेल रहे।

क्रूर प्रहार धरती ने झेला।

निष्ठुर प्रहर बलशाली है।

धरती का सीना धधक रहा।

अम्बर का धीरज पिघल रहा।

    अनिता शर्मा झाँसी 

     (स्व-रचित )


Related Posts

Hunkar rasvanti ke praneta by Dr. indu kumari

September 25, 2021

 हुंकार रसवंती के प्रणेता पैनी दृष्टि पहुँची पहले ऐसे थे रवि कालजयी रचनाएं धूमिल न होगी चमके चाँद सितारे मलिन

Maa laut aa vapas by Rahul Aligadhi

September 24, 2021

 *माँ लौट आ वापस ……*  आता है माँ का ख्याल, मन झकझोर जाता है, माँ लौट आ वापस, तेरा बेटा

Teri judai by nandini laheja

September 24, 2021

 तेरी जुदाई जब कोई अपना हो जाता हमसे जुदा रह जाता सिर्फ तस्वीरों में ,और यादें रहती सदा हर क्षण

Han mai badal rha hu by Rahul Aligadhi

September 24, 2021

 *हाँ, मैं बदल रहा हूँ …*  जी भर के जीना सीख रहा हूँ, आईने में खुद को ढूंढ रहा हूँ।

Dekha hai maine by komal Mishra`koyal

September 23, 2021

  देखा है मैंने देखा है मैंने घरों में,कैद होती आवाजें, गुम होती खुशियाँ,उदास होते चेहरे।  पीले पड़ते होंठ, दम

Toot pada Aakash by vijay Lakshmi Pandey

September 23, 2021

 टूट  पड़ा आकाश …!!! बीती  रात सहसा टूट   पड़ा  आकाश । आलय  देवालय  सब एकाकार । अनवरत गर्जना  दामिनी  दमक

Leave a Comment