Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita aise apradh se hm bachte hai by vinod kumar

.कविता-ऐसे अपराध से हम बचते हैं हम इंसानों ने मंदिर बनाने में पैसा लगाया हम इंसानों ने मस्जिद बनाने में …


.कविता-
ऐसे अपराध से हम बचते हैं

kavita aise apradh se hm bachte hai by vinod kumar

हम इंसानों ने मंदिर बनाने

में पैसा लगाया

हम इंसानों ने मस्जिद बनाने

में पैसा लगाया

हम इंसानों ने गिरजाघर बनाने

में पैसा लगाया

हम इंसानों ने गुरुद्वारा बनाने

में पैसा लगाया

हम धर्मनिरपेक्ष भारत के नागरिक हैं

हम बड़े ही धार्मिक लोग हैं

हमारे धार्मिकता

तब और भी

उमड़-उमड़

कर बाहर निकल आती है

जब हम नागाबाबाओ के सेमिनार

में पैसा लगा

सामिल होते हैं

अरे !यह तो कुछ नहीं

हम धार्मिक स्थलों में

सोने, चांदी, रुपयों के

बंडलों को बड़े प्रेम से चढ़ाते हैं

हम भारत के ही नागरिक है

स्वास्थ्य और शिक्षा की बात पर

अपने हाथों को पीछे खींच लेते हैं

और अशिक्षितो की दशा पर हंसते हैं

स्वास्थ्य कर्मियों और स्वास्थ्य विभाग के

अभाव में मरते इंसानो देखने तक नहीं जाते

हम भारत के नागरिक‌‌‌ है

हमारे तन -मन के संविधान में

स्वास्थ्य और शिक्षा में

पैसा लगाना

अप्राकृतिक है

अपराध है

और भारत के नागरिक‌‌‌ होने के नाते

ऐसे अपराध करने से हम बचते हैं

                -कवि बिनोद कुमार रजक 

                 प्रभारी शिक्षक न्यु डुवार्स हिंदी जुनियर हाईस्कूल ,
                 पोस्ट-चामुरची बानरहाट , जिला-जलपाईगुड़ी

, राज्य-पश्चिम बंगाल


Related Posts

माँ- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

माँ मां देती आंचल की छायाप्रेम की मूरत सी सुंदर कायाअगाध प्रेम की द्योतक रही वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही रब

यादें-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

यादें जब आई न नींद खूब उधेड़े ताने बानेकुछ दिन ही नहीं कुछ महिनें ही नहींसालो तक पहुंचाईबचपन से हुई

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

आज फिर बसंत आई हैं पतझड़ की छोड़ चुन्नरआज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैंहैं बरखा ऋतुओं की रानीबसंत भी

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती

February 14, 2022

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती सामाजिक सद्भाव, सौद्रह्यता, समरसता, मानवतावादी दृष्टि की सोच में युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग

जब वह चुप है- डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

जब वह चुप है! जब वह चुप है इंसान,क्यों कर रहा तू हर जगह बखान,निंदा करना सबसे बड़ा पाप,हर गलती

अंदाजा-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

अंदाजा! ठहरा हुआ दरिया होता है बहुत गहरा ,मुस्कुराहट के पीछे भी हे एक खामोश चेहरा,किसी भी हस्ती को अंदाजे

Leave a Comment