Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita abhilasha by anita sharma

अभिलाषा जब प्राण तन से निकले, तब पास तुम ही रहना। आँखे मेरी खुली हो, पलकें तुम ही बंद करना। …


अभिलाषा

जब प्राण तन से निकले,
तब पास तुम ही रहना।
आँखे मेरी खुली हो,
पलकें तुम ही बंद करना।
देना विदा मुझे तुम ,
न अश्रुधार बहाना।
सोलह शृंगार करके,
दुल्हन सी मुझे सजाना।
अग्नि मेरी चिता को,
तुम कर कमलों से देना।
समय के साथ जीवन,
अपना तुम सजाना।
जब प्राण तन से निकले,
तब आस पास ही रहना।
अलविदा हर रिश्तों से,
कह पिण्डदान करना।
अस्थियों को मेरी,
गंगा में तुम बहाना।
फिर याद न मुझे तुम,
जीवन में फिर करना।
अनिता शर्मा झाँसी
स्वमौलिक रचना


Related Posts

मदर्स डे विशेष -माँ की दुआएं

May 6, 2022

मदर्स डे विशेष माँ की दुआएं घर से सफर करने निकलना हो । माँ को जहन में रख निकला करो

कविता-मां ही जन्नत

May 6, 2022

कविता-मां ही जन्नत न मैं मंदिर पुजू न मस्जिद और न ही गुरूद्वारा,मां के चरणों में ही समाई है देखो

कविता-समाज में और जागरूकता लाए !

May 6, 2022

समाज में और जागरूकता लाए ! समाज में जागरूकता लाए,सभी को शिक्षित बनाए,बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए, समाज में

कविता – कोयले की किल्लत

May 6, 2022

कविता -कोयले की किल्लत कोयले नें राजनीतिक माहौल में गर्मी लाई कमीं दूर अपनी आइडिया समस्याएं बतलाईअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ”

May 4, 2022

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ सुकून को संभालना आसान नहीं बड़े नाज़ों से पालती हूँ, ज़ख़्मों के

कविता-आपनो राजस्थान!

May 2, 2022

 आपनो राजस्थान! रेतीली मरुस्थलीय भूमि,ऊंट पर बैठकर सवारी, जीवंत संस्कृति,जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है विशिष्ट पहचानम्हारों रंगीलों

PreviousNext

Leave a Comment