Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita- aaj phir giraft me aaya darpan by anita sharma

आज फिर गिरफ्त में आया दर्पण, आज फिर गिरफ्त में आया दर्पण, आज फिर चेहरे का नकाब डहा। दिल में …


आज फिर गिरफ्त में आया दर्पण,

kavita- aaj phir giraft me aaya darpan by anita sharma

आज फिर गिरफ्त में आया दर्पण,

आज फिर चेहरे का नकाब डहा।

दिल में दर्द की टीस उठी,

पर चेहरे पर मुस्कान बिछी।

किसी की नजरों से बच न सका,

नजरों ने नब्ज़ को पकड़ लिया।

आज फिर चेहरे की शिनाक्त हुई,

आंखो ने दर्द को बयां जो किया।

अरमाँ जो दिल में दबाये रखे ,

वो दिल ने बयां किये ।

बहुत दबाए रंजोगम दिल में,

आँखो ने छलका ही दिये।

लो अब दिल का गुब्बार उठा,

मन झुन्झलाया तन मुरझाया।

चेहरे ने दर्पण को दिखलाया,

रंजोगम दिल में कितने छुपे।

चेहरे को रिश्वत दे रखी थी,

न हक़ीक़त दिल की झलकेगी।

वो भी न छुपा सका दर्द ,

राज़ भी आम हो गया जग में।

      अनिता शर्मा झाँसी


Related Posts

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

Leave a Comment