Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita Aaj nikal gya by anita sharma

 आज निकल गया  हम कल को संवारने में लगे कि, आज फिसल गया।हम बुन रहे थे भविष्य को कि,आज निकल …


 आज निकल गया 

kavita Aaj nikal gya by anita sharma


हम कल को संवारने में लगे कि,

आज फिसल गया।

हम बुन रहे थे भविष्य को कि,
आज निकल गया।

आगामी कल की कल्पना में ,
आज उलझ गये ।

मुट्ठी में पकड़ना चाहा भविष्य ,
और आज फिसल गया।

कल की फिक्र में लगे थे कि,
आज उम्र ढल गयी।

कल के समय की जोड़-भाग में,
आज हथेली से निकल गया।

जो पल हमारे साथ थे,
वो यूँ ही चले गए ।

हम होश में कब थे कि स्वप्न में रहे,
आज फिक्र में चला गया।

होश में जब आया तो ,
उम्र निकल गयी ।

शौक-तमन्नाए धरी की धरी रह गई,
और आज वक्त चला गया।

चिंता दौड़ भाग में ही,
आज फिसल गया।
                     –अनिता शर्मा–स्वरचित रचना—-


Related Posts

गुरुनानक जी-सुधीर श्रीवास्तव

November 22, 2021

 गुरुनानक जी कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन  तलवंडी,

राजनीति की जीत-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 राजनीति की जीत राजनीति की जीत है यह लोकतंत्र की जीत का मत दो इसे नाम, पहले-पहल जब उठी थी

बंदर और इंसान-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 बंदर और इंसान एक दिन सारे बंदर अपने आपको इंसान घोषित कर देंगे इंसानों के ऊपर  इतिहास के साथ छेड़खानी

Swapn ujle hai by siddharth gorakhpuri

November 17, 2021

स्वप्न उजले हैं. स्वप्न उजले हैं ये कह रहा है कोई। उकेरना चाहता है हकीकत कोई। हकीकत को हकीकत होने

Manzil by Indu kumari

November 17, 2021

 मंजिल भूल जाना किसी तरह से जो  राह की  रूकावट  है सजा लेना माथे पे सदा ही जो जिन्दगी की

Peeda khone ki teri by Dr. H.K. Mishra

November 17, 2021

 पीड़ा खोने की तेरी तोड़ चली हर रस्मों को तेरा पथ ज्योतिर्मय है, मेरा क्या मैं रहा अकेला, कौन सुनेगा

Leave a Comment