Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
Kavita - जीवन सुगम बना दो | Jeevan sugam bana do

kanchan chauhan, poem

Kavita – जीवन सुगम बना दो | Jeevan sugam bana do

जीवन सुगम बना दो मैं कुदरत का प्यारा पंछी हूं,तुम सब के बीच मैं रहता हूं। मेरी आंख के आंसू …


जीवन सुगम बना दो

Kavita - जीवन सुगम बना दो | Jeevan sugam bana do

मैं कुदरत का प्यारा पंछी हूं,
तुम सब के बीच मैं रहता हूं।

मेरी आंख के आंसू सूख गए,
अब तुम से शिकायत करता हूं।
लम्बी चौड़ी कोई बात नहीं,
मैं इतनी गुज़ारिश करता हूं।
बस इतनी अरदास मेरी तुमसे,
मेरा जीवन सुगम बना दो तुम।
कितनी मुश्किल मानव ने दी,
मुझे उन से छूट दिला दो तुम।

धरती है कितनी उबल रही,
पेड़ों की मुझ को छांव नहीं।

मैं भरी दुपहरी दर – दर भटकूं
दो बूंद पानी की आस लिए।

व्याकुल हूं मैं, भीषण गर्मी में,
अब नहीं ठिकाना मेरा कोई।

घर में जो जा़ली, झरोखे थे,
वो भी अब बीती बात हुए।

बारिश भी मुझसे छीनी गई,
तालाब अब स्विमिंग पूल हुए।

थोड़ा सा तरस करो मुझ पर,
कुछ सोचो अब मेरे बारे में।

तुम सब का प्यारा पंछी हूं,
ना पिंजरे में मुझको कैद करो।

थोड़ा पानी छत पर रख दो तुम,
अब थोड़ा सा मुझ पर रहम करो।

मैं अंबर में उड़ता पंछी हूं,
मेरा जीवन सुगम बना दो तुम।

कितनी मुश्किल मानव ने दी,
मुझे उन से मुक्त करा दो तुम।

पेड़ लगा कर इस धरती पर,
मुझे मेरा घर लौटा दो तुम।

बस यही ख्वाहिश है मेरी,
मेरा जीवन सुगम बना दो तुम।

About author 

कंचन चौहान,बीकानेर

Related Posts

गुंजा के दाने

October 1, 2022

गुंजा के दाने रमणीय , मनमोहक , चमकदारगुंजा के दाने मन को हर जाते हैसुर्ख चटकीले लाल रंग लिये येकाले

गांधीजी के सिद्धांत व विचार

October 1, 2022

2 अक्टूबर 2022 महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष में उनके सिद्धांतों और विचारों पर मौलिक रचना कविता –गांधीजी के सिद्धांत

Phir Wahi Qissa Sunana To Chahiye

October 1, 2022

 Phir Wahi Qissa Sunana To Chahiye फिर वही क़िस्सा सुनाना तो चाहिए फिर वही सपना सजाना तो चाहिए यूँ मशक़्क़त

मुझे कहां पता था

October 1, 2022

मुझे कहां पता था आरज़ू थी तेरे संग जिंदगी बिताऊंगीआरज़ू थी तेरा साथ अंत तक मैं निभाऊंगी।। मेरी आरज़ूओं को

Gawaai Zindagi Jakar Bachhaani Chahiye Thi

October 1, 2022

Gawaai Zindagi Jakar Bachhaani Chahiye Thi गँवाई ज़िंदगी जाकर बचानी चाहिए थीबुढ़ापे के लिए मुझको जवानी चाहिए थी समंदर भी

हदें

September 28, 2022

हदें शान हैं उसी में इंसान अपनी हद में रहेंजब छोड़ हद न समंदर न ही नदी बहेँइंसान ही हद

PreviousNext

Leave a Comment