Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Prem Thakker

Kavita :बेशुमार इश्क | Beshumar ishq

बेशुमार इश्क सुनो दिकु…… मेरी यह बेकरारी, मेरा ये जुनूनवो मेरी तड़पन, बन्द आखों में  तुम्हारी गोद में सर रखने …


बेशुमार इश्क

Kavita :बेशुमार इश्क | Beshumar ishq

सुनो दिकु……

मेरी यह बेकरारी, मेरा ये जुनून
वो मेरी तड़पन, बन्द आखों में 

तुम्हारी गोद में सर रखने का सुकून
यह इश्क नहीं तो क्या है
बेशुमार इश्क ही मतलब है इसका
मेरा तुम्हारे मिलन को तरसना
तुम से दूरी का दर्द आँखों से यूँ बरसना
यह इश्क नहीं तो क्या है
बेशुमार इश्क ही मतलब है इसका
तुम्हारे इंतज़ार में बिखर गया
कटरा सा प्रेम तुम से पाकर में निखर गया
यह इश्क नही तो क्या है
बेशुमार इश्क ही मतलब है इसका
कागज़, हथेली, आखों पर लिखता हूँ
में अक्सर हर दिन तुम पर मर मिटता हूँ
यह इश्क नहीं तो क्या है
बेशुमार इश्क ही मतलब है इसका

प्रेम का इंतज़ार अपनी दिकु के लिए

About author

प्रेम ठक्कर | prem thakker

प्रेम ठक्कर
सूरत ,गुजरात 

ऐमेज़ॉन में मैनेजर के पद पर कार्यरत 

Related Posts

Aabhasi bediyaan by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 आभासी बेड़ियां पिंजरे का पंछी उससे बाहर निकलकर भी उड़ान भरने में हिचकिचाता है बहुत बार, वो दर-असल कैद है

Harj kya hai by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 हर्ज क्या है? भाषण से पेट भरने की कला सीख ली है हमनें, रोटी को गाली देनें की  हिमाकत करने

Bura man kar mat baitho by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 बुरा मनाकर मत बैठो उस समय भले ही बुरा लगे जब हमारे बुजुर्ग  डांट देते हैं हमें गुस्से में आकर,

Prem pathik by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 प्रेम पथिक एक प्रेम बचपन में हुआ था पुस्तकों से, जब भी खोला उन्हें पहुंच गया रहस्य,रोमांच, अहसास और कल्पना

दर्द कहां से पाया हूं ?- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

September 22, 2021

 दर्द कहां से पाया हूं ? तपन जीवन की कहती है ,अपना जो शेष जीवन है ,धरा पर जो सुरक्षित

Desh ka durbhagya by Jitendra Kabir

September 22, 2021

 देश का दुर्भाग्य  कृषि के लिए नीतियां बनाने में कृषक का प्रतिनिधित्व नहीं, शिक्षा के लिए नीतियां बनाने में शिक्षक

Leave a Comment