Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veerendra Jain

Kavita–फितूर| Fitoor

कविता : फितूर सुना है बड़े मशहूर हो गए हो,क्या इसलिए इतनी दूर हो गए हो ! हर बात चुभती …


कविता : फितूर

सुना है बड़े मशहूर हो गए हो,
क्या इसलिए इतनी दूर हो गए हो !

हर बात चुभती है खंजर सी लेकिन,
फिर भी मुझे तुम मंजूर हो गए हो ।

अजनबियों जैसे मिलने लगे हो,
बड़े आदमी से हुजूर हो गए हो !!

मिले भी तो कर्ज़ा उतारा हो जैसे,
इतने भी क्या मग़रूर हो गए हो !!

लिबास-ए-शोहरत उतारोगे जब भी,
देखना कितने बेनूर हो गए हो !!

मुरव्वत जो कर दी तो इतरा रहे हो,
गुनहगार हो न बेकुसूर हो गए हो !!

बस भी करो अब सताओगे कितना,
मुहब्बत नहीं तुम फ़ितूर हो गए हो !!

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13

Related Posts

डॉ. राजेंद्र प्रसाद- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

डॉ. राजेंद्र प्रसाद जीरादेई सीवान बिहार मेंतीन दिसंबर अठारह सौ चौरासी में,जन्मा था एक लाल।दुनिया में चमका नाम उसका,थे वो

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

Leave a Comment