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Kaun tay karke aaya tha? by Jitendra Kabir

 कौन तय करके आया था? ब्राह्मण के घर लेना था जन्म या फिर क्षत्रिय, वैश्य अथवा शूद्र के यहां, कौन …


 कौन तय करके आया था?

Kaun tay karke aaya tha? by Jitendra Kabir

ब्राह्मण के घर लेना था जन्म

या फिर क्षत्रिय, वैश्य अथवा

शूद्र के यहां,

कौन तय करके आया है

इस दुनिया में?

हिन्दू के घर लेना था जन्म

या फिर मुसलमान, ईसाई,

बौद्ध अथवा जैन के यहां,

कौन तय करके आया है

इस दुनिया में?

अमीर के घर लेना था जन्म

या फिर किसी गरीब के यहां,

राजा के महल में लेना था

या फिर किसी फकीर के यहां,

चोर – डाकू के घर में लेना था

या फिर किसी ईमानदार के यहां,

कौन तय करके आया है

इस दुनिया में?

भारत में लेना था जन्म

या फिर पाकिस्तान, अफगानिस्तान

अथवा और किसी मुल्क में,

कौन तय करके आया है

इस दुनिया में?

जब दुनिया में पैदा होने वाले

किसी भी इंसान के पास

अपना धर्म, जाति, नस्ल, देश चुनने का

था ही नहीं कोई विकल्प

तो फिर इन सबके आधार पर

इंसान – इंसान में भेदभाव करके

दुनिया को नफरतों का नर्क बनाने का

षड़यंत्र किसका है?

                                   जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


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