Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kaun tay karke aaya tha? by Jitendra Kabir

 कौन तय करके आया था? ब्राह्मण के घर लेना था जन्म या फिर क्षत्रिय, वैश्य अथवा शूद्र के यहां, कौन …


 कौन तय करके आया था?

Kaun tay karke aaya tha? by Jitendra Kabir

ब्राह्मण के घर लेना था जन्म

या फिर क्षत्रिय, वैश्य अथवा

शूद्र के यहां,

कौन तय करके आया है

इस दुनिया में?

हिन्दू के घर लेना था जन्म

या फिर मुसलमान, ईसाई,

बौद्ध अथवा जैन के यहां,

कौन तय करके आया है

इस दुनिया में?

अमीर के घर लेना था जन्म

या फिर किसी गरीब के यहां,

राजा के महल में लेना था

या फिर किसी फकीर के यहां,

चोर – डाकू के घर में लेना था

या फिर किसी ईमानदार के यहां,

कौन तय करके आया है

इस दुनिया में?

भारत में लेना था जन्म

या फिर पाकिस्तान, अफगानिस्तान

अथवा और किसी मुल्क में,

कौन तय करके आया है

इस दुनिया में?

जब दुनिया में पैदा होने वाले

किसी भी इंसान के पास

अपना धर्म, जाति, नस्ल, देश चुनने का

था ही नहीं कोई विकल्प

तो फिर इन सबके आधार पर

इंसान – इंसान में भेदभाव करके

दुनिया को नफरतों का नर्क बनाने का

षड़यंत्र किसका है?

                                   जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

मेरे किस्से -सतीश सम्यक

February 7, 2022

मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी

बेरोजगार हूं-दीप मदिरा

February 7, 2022

बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 6, 2022

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम- सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम हे बापू हे राष्टृपिता संत साबरमती केपुजारी अहिंसा केतुम्हें नमन हैकोटि कोटि प्रणाम है।देश में आज

दोस्तों के नाम की शाम-सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

दोस्तों के नाम की शाम आइए!कुछ करते नहीं तो बस इतना करते हैं,एक शाम दोस्तों के नाम करते हैं,मौज मस्ती

Leave a Comment