Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kaun kiske liye ? by jitendra kabir

 कौन किसके लिए? इस देश में जनता, जो वोट देती है अपनी बेहतरी के लिए, सहती है उसके बाद तमाम …


 कौन किसके लिए?

Kaun kiske liye ? by jitendra kabir

इस देश में

जनता, जो वोट देती है

अपनी बेहतरी के लिए,

सहती है उसके बाद

तमाम तरह की समस्याएं,

कानून व प्रशासन की ज्यादतियां

और नाकामियां,

नेता, जो वोट लेता है

जनता की बेहतरी के लिए,

भोगता है उसके बाद

तमाम तरह की सुख – सुविधाएं,

कानून व प्रशासन उनका

स्वार्थ सिद्ध करने में बनते बैसाखियां,

अब बताओ जरा

लोकतंत्र में जनता पैदा होती है

नेता के लिए

या फिर नेता जनता के लिए बना?

इस देश में

जनता, जो टैक्स देती है

अपनी बेहतरी के लिए,

झेलती है उसके बाद

तमाम तरह की आर्थिक समस्याएं,

कानूनी एवं न्यायिक पेचीदगियां

और अपनी सुरक्षा सम्बन्धी चिंताएं,

सरकारें, जो टैक्स लेती हैं

जनता की बेहतरी के लिए,

सरकारों में शामिल लोग

उसी टैक्स के पैसों से

अरबों-खरबों खर्च करके जुटाते हैं

अपने लिए घूमने फिरने और

सुरक्षित रहने की सुविधाएं,

अब बताओ जरा

इस लोकतंत्र को कहा जा सकता है

जनता का जनता के हित में शासन

या फिर कर लिया है हमनें

आज के दौर का नया राजतंत्र खड़ा?

                               जितेन्द्र ‘कबीर’

                               

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

सलोनी के कुसुम”- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

सलोनी के कुसुम” इंसान बेइन्तहा मजबूर दिखा,कुसुम सी बालिकाएं तीर्थ पर,बेंच रही पूजा का सामान छोली में।चेहरे पर मुस्कान बिखेरी

हवाओं से बात- डॉ. माध्वी बोरसे!

January 25, 2022

हवाओं से बात! सनन सनन सी हवा मैं सांस लेते हुए खुलकर, जीते हैं अपने सारे दुख गम को भूल

संगीत-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 25, 2022

संगीत! एक मधुर सी ध्वनि जब कानों में गुनगुनाती,मन को प्रसन्नता से भर जाती,योग की तरह होता है संगीत,हर एक

आभासी दुनियाँ- सरस्वती मल्लिक

January 25, 2022

आभासी दुनियाँ अद्भुत है बहुत ,यह आभासी दुनियाँप्यारी है बहुत ,जैसे सपनों की दुनियाँमित्र मिले यहाँ बहुत ,बनी नए रिश्तों

तू डोर मैं पतंग- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

तू डोर मैं पतंग ईश्वर के हाथों में जीवन डोर-हम पतंग जैसे उड़ रहे।खींचता और ढील देता विधाताहम नाचते अंहकार

देश के वीर सपूतों में वीरांगना- डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

देश के वीर सपूतों में वीरांगना वीरता की श्रृंखला में जुड़करप्रहरी बन आ रही है बहनाभाई हिम्मत नहीं है हारनाचल

Leave a Comment