अपना कश्मीर और मधुकवि
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मधुकवि राकेश मधुर
अपना कश्मीर और मधुकवि अब तो सोए हुए भारती जाग जा|| देखले अपने भारत की क्या है दशा|| आज हिन्सा …
मधुकवि राकेश मधुर
November 9, 2021
उड़ी रे पतंग* उड़ी उड़ी रे पतंग मेरी उड़ी रे। लेके भावनाओं के साथ उड़ी रे। भर के उमंगो संग
November 7, 2021
कौन तय करके आया था? ब्राह्मण के घर लेना था जन्म या फिर क्षत्रिय, वैश्य अथवा शूद्र के यहां, कौन
November 7, 2021
कवितासुशासन को आखिरी छोर तक ले जाना हैं सरकारों को ऐसी नीतियां बनाना हैं सुशासन को आखरी छोर तक ले
November 7, 2021
अब की बार ऐसी हो दिवाली अबकी बार मनाओ ऐसी दिवाली । गाँव – शहर में हो जाए खुशहाली ।
November 7, 2021
परकोटा मैं परकोटा हूँ न जाने कब से खड़ा हूँ मेरा इतिहास बड़ा है मैं कई युद्धों व् योद्धाओं का
November 7, 2021
यादें दिवाली तो वो भी थी जब ऑनलाइन शुभेच्छाएं दी थी हमने और एक ये भी हैं जब रूबरू हैं