Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Rakesh madhur

Kashmir par kavita | कश्मीर पर कविता

अपना कश्मीर और मधुकवि अब तो सोए हुए भारती जाग जा|| देखले अपने भारत की क्या है दशा|| आज हिन्सा …


अपना कश्मीर और मधुकवि

Kashmir par kavita | कश्मीर पर कविता
अब तो सोए हुए भारती जाग जा||
देखले अपने भारत की क्या है दशा||
आज हिन्सा अहिंसा को डसने लगी||
करुणा कश्मीर में अब सिसकने लगी||
कर दे आबाद अब आज कश्मीर को,
अग्निवीरों की नव बस्तियां दे बसा||
अब तो सोए हुए भारती जाग जा||
भारतीयों की ए सभ्यता ही नहीं||
अपने भारत सी न भव्यता है कहीं||
चोट करता कोई क्रूर आदर्श पर,
दागकर गोलियां लूटता अस्मिता||
अब तो सोए हुए भारती जाग जा||
हैं अमन चैन के दुश्मनों का हुजूम||
मौन जाने है क्यों आज दारुल उलूम||
आज ओबैसी  की बोलती बंद है,
बोल कुछ बोल कश्मीर कब किस का था||
अब तो सोए हुए भारती जाग जा||
शान्त सैतान होते नहीं प्यार से||
काट दो गर्दनें तेग तलवार से||
सिर्फ सेनानियों को ही कश्मीर है,
क्योंकि आतंकियों की  यहाँ अधिकता ||
अब तो सोए हुए भारती जाग जा||

About author 

Madhukavi Rakesh madhur

मधुकवि राकेश मधुर

गांव-चाबरखास
तहसील–तिलहर
जनपद-शाहजहांपुर यू पी


Related Posts

Maa- Archana chauhan

February 16, 2022

माँ इंसान नहीं अब सामानों की ,फिक्र बस रह गई तू ही बता ए जिंदगी , तू इतनी सस्ती कैसे

सम्मान-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

सम्मान! एक वक्त की थी यह बात,खरगोश ने कछुए का उड़ाया मजाक, कितना धीमे चलते हो तुम,कछुए को आया गुस्सा

लालची लोमड़ी-डॉ. माध्वी बोरसे

February 14, 2022

लालची लोमड़ी! भरी दोपहर में एक दिन लोमड़ी भटके,कर रही थी भोजन की तलाश,दिखे उसे बेल में अंगूर लटके,किया उसे

बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी

February 14, 2022

 बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी जब से मानव समाज की शुरुआत हुई है तब से लेकर अब

मेरे लेखन का ध्येय- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

मेरे लेखन का ध्येय मुझे पता है कि आजकल मेरा लेखनसरकार में शामिल दलों औरउनके समर्थकों को नहीं भाता हैक्योंकि

जनता का जूता जनता का ही सिर-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

जनता का जूता जनता का ही सिर देश में उपलब्ध होने वालीहर एक वस्तु एवं सेवा परमनचाहा कर लगाकर लोगों

Leave a Comment