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Nandini_laheja, poem

Kasam kavita| कसम कविता

कसम कोई कहे कसम मुझे,कोई कहता हैं वादा।कोई कहता मुझे वचन,पर न हर कोई, मुझे निभाता।मैं प्रण हूँ,मैं हूँ शपथ।मैं …


कसम

कोई कहे कसम मुझे,
कोई कहता हैं वादा।
कोई कहता मुझे वचन,
पर न हर कोई, मुझे निभाता।
मैं प्रण हूँ,मैं हूँ शपथ।
मैं दृढ हूँ,पर कठिन हैं पथ।
कभी प्रलोभनों के आगे, झुक जाता।
कभी कठिनाइयों से डर, टूट जाता।
केवल उन्होंने निभाया मुझे,
जिन्हे प्राणों से प्रिय था, उनका वादा।
मैं कसम ,कभी करूँ ,
दृढ़ लक्ष्य को तेरे,
कभी लाचार, भी कर देता।
कभी बनता कारण, बंधन का।
कभी जुदा भी कर देता।

About author 

 

नंदिनी लहेजा | Nandini laheja
नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

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