Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Nandini_laheja, poem

Kasam kavita| कसम कविता

कसम कोई कहे कसम मुझे,कोई कहता हैं वादा।कोई कहता मुझे वचन,पर न हर कोई, मुझे निभाता।मैं प्रण हूँ,मैं हूँ शपथ।मैं …


कसम

कोई कहे कसम मुझे,
कोई कहता हैं वादा।
कोई कहता मुझे वचन,
पर न हर कोई, मुझे निभाता।
मैं प्रण हूँ,मैं हूँ शपथ।
मैं दृढ हूँ,पर कठिन हैं पथ।
कभी प्रलोभनों के आगे, झुक जाता।
कभी कठिनाइयों से डर, टूट जाता।
केवल उन्होंने निभाया मुझे,
जिन्हे प्राणों से प्रिय था, उनका वादा।
मैं कसम ,कभी करूँ ,
दृढ़ लक्ष्य को तेरे,
कभी लाचार, भी कर देता।
कभी बनता कारण, बंधन का।
कभी जुदा भी कर देता।

About author 

 

नंदिनी लहेजा | Nandini laheja
नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

Related Posts

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान।

August 30, 2022

कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान। यह कैसा शब्द है कन्यादान, कौन करता है अपनी जिंदगी को दान,माता- पिता की जान से बढ़कर,कैसे

हां मैं हूं नारीवादी!

August 28, 2022

हां मैं हूं नारीवादी! नारीवाद के प्रमुख प्रकार, स्‍त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार,ऐसा विश्‍वास या सिद्घांत,भेदभाव का हो देहांत,और

खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता

August 28, 2022

कविता: खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता  कभी

कब प्रशस्त होगी हर नारी

August 25, 2022

“कब प्रशस्त होगी हर नारी” अब एक इन्कलाब नारियों की जिजीविषा के नाम भी हो, तो कुछ रुकी हुई ज़िंदगियाँ

वजह-बेवजह रूठना

August 25, 2022

वजह-बेवजह रूठना। वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के

कविता -शहर

August 22, 2022

शहर गांवों के सपने  संभाल लेता है शहर  हो जाओ दूर कितना भी पास बुला लेता है शहर । गांवों

PreviousNext

Leave a Comment