Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Karva chauth ka Anupam tauhar by Jitendra Kabir

 करवा चौथ का अनुपम त्यौहार जिन पति – पत्नी ने बनाकर रखा है अपने मन में यह भ्रम  कि उनके …


 करवा चौथ का अनुपम त्यौहार

Karva chauth ka Anupam tauhar by Jitendra Kabir

जिन पति – पत्नी ने

बनाकर रखा है अपने मन में यह भ्रम 

कि उनके साथी ने

जवानी से लेकर बुढ़ापे तक उसके अलावा

और किसी का साथ कभी भी चाहा नहीं,

उत्तेजक कोई दृश्य अथवा चलचित्र देख

खुद को उन कलाकारों की जगह रखकर 

मन ही मन रस लेने का ख्याल भी 

जिनके मन मस्तिष्क में कभी घुस पाया नहीं,

तनाव के क्षण आए जब उनके रिश्ते में

तो गुस्से में आकर 

एक – दूसरे की गलतियों को गिना – गिनाकर

जिन लोगों ने राई का पहाड़ कभी भी बनाया नहीं,

ज्यादती की हो उनके साथी ने 

चाहे कितनी ही ज्यादा उनके ऊपर 

लेकिन बावजूद उसके एक पल के लिए

अपने साथी का अहित चाहने का ख्याल भी

जिन लोगों के मन में कभी भी आया नहीं,

हैं अगर ऐसे भी विरले लोग दुनिया में

तो उनके लिए शायद 

फलदायी सिद्ध हो सकता है सात जन्मों तक

बंधन पक्का करने का दावा करने वाला

करवा चौथ का यह अनुपम त्यौहार,

बाकियों के लिए तो है एक दूसरे के मन को

भरमाने के लिए 

हर साल खेला जाने वाला नाटक ही है

जिसका फायदा दुकानदारों के अलावा

और किसी ने आज तक कमाया भी नहीं।

जितेन्द्र ‘कबीर’
                                    
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Maa- Archana chauhan

February 16, 2022

माँ इंसान नहीं अब सामानों की ,फिक्र बस रह गई तू ही बता ए जिंदगी , तू इतनी सस्ती कैसे

सम्मान-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

सम्मान! एक वक्त की थी यह बात,खरगोश ने कछुए का उड़ाया मजाक, कितना धीमे चलते हो तुम,कछुए को आया गुस्सा

लालची लोमड़ी-डॉ. माध्वी बोरसे

February 14, 2022

लालची लोमड़ी! भरी दोपहर में एक दिन लोमड़ी भटके,कर रही थी भोजन की तलाश,दिखे उसे बेल में अंगूर लटके,किया उसे

बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी

February 14, 2022

 बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी जब से मानव समाज की शुरुआत हुई है तब से लेकर अब

मेरे लेखन का ध्येय- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

मेरे लेखन का ध्येय मुझे पता है कि आजकल मेरा लेखनसरकार में शामिल दलों औरउनके समर्थकों को नहीं भाता हैक्योंकि

जनता का जूता जनता का ही सिर-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

जनता का जूता जनता का ही सिर देश में उपलब्ध होने वालीहर एक वस्तु एवं सेवा परमनचाहा कर लगाकर लोगों

Leave a Comment