Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

karm hi Ishwar by kamal siwani bihar

                      कर्म ही ईश्वर   क्या ईश्वर  मिलता  है  हमको , …


                      कर्म ही ईश्वर 

karm hi Ishwar by kamal siwani bihar

 क्या ईश्वर  मिलता  है  हमको , अंग  भभूत  रमाने  में ?
 क्या ईश्वर मिलता है हमको , हठ का योग अपनाने में ?
 ईश्वर मिलता  हमें  कदाचित , ढोल – मृदंग  बजाने  में ?
 ईश्वर मिलता  हमें  कहाँ  कब ,  ऊँचे  स्वर  में गाने  में ?
 ईश्वर ने  कब  हमें  बताया , जा  निष्क्रिय  बन  जाओ ?
 कर्म – धर्म सारे छोड़ अपने ,  नाम  मेरा  बस  गाओ ?
 केवल  नाम   रटन   में   ही  बस ,  सारे  दिन   कटेंगे  ?
 जीने  हेतु   भोजन  –  पानी ,  किसके   किए   मिलेंगे ?
 भौतिक साधन जिनके बल पर , जीवन यह पलता है ।
 बिन उसके कोई भी प्राणी , एक  पग  ना  चलता  है ।।
 उन्हें  लाकर  बोलो  हमको ,  कौन  खरीदकर   देगा  ?
 उसके  बदले   हमसे   कोई ,  कुछ  भी  ना  वो  लेगा ?
 अगर  दिया    उसका   लेंगे  तो ,  पौरुष  हममें  होगा ?
 सोचें अपना आतम बल तब , जरा भी मुखरित होगा  ?
 ईश्वर  ने   है   हमें   बनाया   ,  कर्म  यहाँ  करने   को  ।
 ना  कि  केवल  योगी  बनकर  , भू  पर  विचरने  को ।।
 हाथ – पाँव ये  मिले  हैं  हमको ,  केवल  धूनि  रमाने  ?
 नाम  लेकर  ईश्वर  का  केवल ,   भक्ति   के  पद गाने ?
 इसी  ढर्रे   पर  सब  प्राणी  जन ,  चलने  अगर  लगेंगे ।
 फिर  तो  सारे  काज  जगत  के ,  कैसे  भला  चलेंगे  ?
 छोड़कर  सारी    अकर्मण्यता ,  ज्ञान    यही  अपनाएँ ।
 कर्म ही ईश्वर अखिल जगत में , उसी में  उसको  पाएँ ।।                                
         — कमल सीवानी ,रामगढ़ , सीवान ,बिहार

Related Posts

हर चेहरा कुछ कहता है-भावना ठाकर

May 24, 2022

 “हर चेहरा कुछ कहता है” हर इंसान के मन में उठते तरंगों को प्रतिबिंबित करता आईना है चेहरा, अपनों की

परम शक्ति!

May 17, 2022

परम शक्ति! किस बात का गुरूर है तुझे इंसान,तू इतना भी हे नहीं महान,करने वाला वह, कराने वाला वह,वही चला

सुरम्य एवं सहज जीवन!

May 17, 2022

सुरम्य एवं सहज जीवन! गुरुर में रास्ते धुंधले पड़ जाएंगे,खुद के अलावा किसी को कैसे देख पाएंगे,प्रेम और जुनून के

मार्मिक कविता – कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक़

May 17, 2022

मार्मिक कविता -कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी से आंखें सभकी भर आई वो

धूप छांव

May 15, 2022

धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार

माँ-हरविंदर सिंह ‘ग़ुलाम’

May 14, 2022

माँ सुना देवताओं के बारे में अक्सरमगर देव कोई कभी भी न आया लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको हर

PreviousNext

Leave a Comment