Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kamkaji mahilaon ki trasdi by Jitendra Kabir

 कामकाजी महिलाओं की त्रासदी कामकाजी महिलाएं   पिसती हैं प्रतिदिन  घर की जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच, घर के कामों को  …


 कामकाजी महिलाओं की त्रासदी

Kamkaji mahilaon ki trasdi by Jitendra Kabir

कामकाजी महिलाएं  

पिसती हैं प्रतिदिन 

घर की जिम्मेदारियों और नौकरी के बीच,

घर के कामों को 

समय से ना निपटा पाने के लिए

सुनती हैं ताने अक्सर,

नौकरी में भी हो जाती हैं‌ पैदा कई बार 

असहज स्थितियां,

घर- बाहर का दवाब दिखाता है अपना असर

शरीर और दिमाग दोनों पर,

बार-बार बीमार पड़ते शरीर और

 बेचैन थके दिमाग के साथ 

वो कोशिश करती हैं भरपूर

किसी तरह ‘पूरा’ पड़ने की

मगर नहीं होती  ज्यादातर कामयाब,

स्वयं को ‘मार्डन’ दिखाने वाले घरवाले,

उसकी कमाई पर तो रखते हैं 

पूरा अधिकार 

लेकिन नहीं बनते बहुधा

उसके रोज के संघर्ष के हिस्सेदार,

औरत के प्रति उनकी

उदारवादी सोच

सीमित होती है सिर्फ पैसे घर आने

के लालच तक,

नौकरी करके

थोड़ी सी आर्थिक आजादी की

उम्मीद रखने वाली महिलाएं

अक्सर वंचित रहती हैं

अपने खाते के एटीएम कार्ड से भी,

जबकि उनकी कमाई से

बहुत बार दुनिया को अपनी शान 

दिखाते हैं उनके घरवाले।

                          जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा

December 17, 2022

 गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा तिरंगा है हमारी जान, कहलाता देश की शान। तीन रंगों से बना तिरंगा, बढ़ता हम

Saraswati vandana basant panchami special

December 17, 2022

सरस्वती वंदना बसंत पंचमी विशेष हे विद्यादायिनी ! हे हंसवाहिनी ! करो अपनी कृपा अपरम्पार।हे ज्ञानदायिनी ! हे वीणावादिनी !बुद्धि

Maa-ki-mamta-par-kavita

December 17, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है कोई करता कोई नहीं

Pita ke pyar par kavita

December 17, 2022

कविता-पिता का प्यार अनमोल है पिता का प्यार अनमोल है पर वह कभी जताते नहीं बच्चों के लिए सब कुछ

Tumse hai hausala

December 17, 2022

 तुमसे है हौंसला  ढलती हुई किसी शाम मेंमेरे कांधे पर अपना सर रखेबैठी हो तुम जब,तुम्हारी पलकें आंसुओं से भीगी

योजनाओं का लाभ लिए दिए पर मिलता है भाई

December 17, 2022

व्यंग्य कविता–योजनाओं का लाभ लिए दिए पर मिलता है भाई सुशासन समागम में सीएम ने यह बात बिना हिचक के

PreviousNext

Leave a Comment