Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kaise puri ho ummiden hamari by Jitendra Kabir

 कैसे पूरी हों उम्मीदें हमारी? हमारे देश की जनता  चुनावों के समय नहीं देखती कि… उम्मीदवार पढ़ा लिखा है या …


 कैसे पूरी हों उम्मीदें हमारी?

Kaise puri ho ummiden hamari by Jitendra Kabir

हमारे देश की जनता 

चुनावों के समय नहीं देखती

कि…

उम्मीदवार पढ़ा लिखा है

या है कोई अनपढ़,

ईमानदार है अपने काम में

या फिर है  कोई भ्रष्टाचारी,

झूठे आश्वासन देकर

मूर्ख बनाता रहता है सबको

या फिर अपने वचनों के प्रति

उसके मन में है वफादारी,

शरीफ सभ्य नागरिक है

या फिर है कोई ठग, बेइमान

अपराधी अथवा दुराचारी,

प्रशासनिक योग्यता रखता है

या फिर है उसमें सिर्फ

झूठी लफ्फाजी की कलाकारी,

समाज के सर्वांगीण विकास का

‘विजन’ है उसके पास कोई

या फिर साम-दाम-दंड-भेद से

सत्ता में आने की है उसमें बेकरारी,

सत्ता एवं सुविधाओं की चाह में

राजनीति करने उतरा है

या फिर वास्तव में जनसेवा की

है उसमें चिंगारी,

हमारे देश की जनता 

चुनावों के समय देखती है

कि…

अपने धर्म या फिर जाति से

कौन खड़ा है धनुर्धारी,

भ्रष्ट होकर उनका निजी स्वार्थ

कौन पूरा कर सकता है

या फिर किसे है सच-झूठ बोलकर

लोगों को बहलाने की बीमारी,

बहुत से ऐसे हैं ‘कैडर वोट’

कि बाप दादा के समय से ही

निभा रहे दल विशेष की वफादारी,

काला कुत्ता भी उस दल से

हो जाए खड़ा चुनाव में

तो वो उसकी भी करेंगे फरमाबरदारी,

चुनावों के समय जब देश के लोगों की

बुनियादी जरूरतें व समस्याएं

बनती ही नहीं चर्चा का केंद्र हमारी,

अच्छे प्रशासन, संवेदनशील कानून,

निष्पक्ष एवं त्वरित न्याय,

सांप्रदायिक सौहार्द की कसौटी पर

जब हम कसते ही नहीं 

किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी,

तो फिर आश्चर्य नहीं कि हारती रहें

देश में बेहतरी की उम्मीदें हमारी।

                               जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

नफरत की आग

June 24, 2022

 नफरत की आग जितेन्द्र ‘कबीर’ आग! आग से बुझती नहीं कभी, बुझती है रेत या फिर पानी से, नफरत की

ईश्वर क्या है?

June 24, 2022

 ईश्वर क्या है? जितेन्द्र ‘कबीर’ एक उम्मीद है! कुछ अच्छा होने की, अपने जीवन में कठिनाइयों से जूझते इंसान के

ऐसे बदलाव नहीं आएंगे

June 24, 2022

 ऐसे बदलाव नहीं आएंगे जितेन्द्र ‘कबीर’ सिर्फ इसलिए कि हमें बुरा लगता है देखना… देश को दंगे-फसादों में जलते हुए,

कोई क्या कर पाएगा?

June 24, 2022

 कोई क्या कर पाएगा? जितेन्द्र ‘कबीर’ बहुत मेधावी होगा अगर किसी का बच्चा तो डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, खिलाड़ी या

दुनियादारी

June 24, 2022

 दुनियादारी जितेन्द्र ‘कबीर’ बड़े खुश थे सभी चुप रहा करते थे जब तक, जरा सी जुबान जो खोली तो शिकवे

लूट मची है लूट

June 24, 2022

 लूट मची है लूट जितेन्द्र ‘कबीर’ शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जो छोटे-बड़े ‘कुकुरमुत्ते’ उग आए हैं अवसर पाकर,

PreviousNext

Leave a Comment