Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kaikeyi ke ram by Sudhir Srivastava

 कैकेयी के राम कितना सरल है कैकेयी के चरित्र को परिभाषित करना, स्वार्थी, लालची, पतिहंता कहना, लांछन लगाना पुत्रमोही को …


 कैकेयी के राम

Kaikeyi ke ram by Sudhir Srivastava

कितना सरल है

कैकेयी के चरित्र को

परिभाषित करना,

स्वार्थी, लालची, पतिहंता

कहना, लांछन लगाना

पुत्रमोही को अपमानित

उपेक्षित करना।

बड़ा सरल सा है ये सब

जो दुनिया को दिखता है,

सारा जग यही तो कहता है।

बस ! नहीं दिखता है तो

कैकेयी का वास्तविक चरित्र

जिसके कारण राम राम से

मर्यादा पुरुषोत्तम राम बन गये।

सारे संसार में,जन जन में

कण कण में बस गये।

कितना मुश्किल रहा होगा वो पल

जब अपने प्राणों से भी प्रिय 

राम को वन गमन कराया,

पति मृत्यु का लाँछन

अपने माथे पर लगवाया।

कोखजाये की उपेक्षा सहना

जनमानस की नजरों में

एकाएक गिर जाना,

परंतु संकल्प, स्वाध्याय से

तनिक भी विचलित न होना

जीते जी मृत्यु सा अहसास करना

एक राजरानी का 

चहुँओर से चलते

जहरीले व्यंग्य बाण सहना

फिर भी न विचलित होना

आसान नहीं था।

बस एक आस, विश्वास था

कौशल्या सुत राम

साक्षात विष्णु का अवतार था,

कौशल्या को कैकेयी पर

अटल विश्वास था,

राम पर कौशल्या से अधिक

कैकेयी का अधिकार था

तभी तो कैकेयी के अंदर

इतना आत्मविश्वास था।

तभी तो माँ की ममता

ममताहीन हो गयी,

अपने सिर पर कलंक ले

दो वचनों की आड़ ले

जिद पर अड़ गई,

कैकेयी ही थी जो राम को

मर्यादा पुर्षोत्तम राम बना गई,

वंश,कुल अयोध्या ही नहीं

सकल जहां को उनका

तारणहार दे गई।

राम के साथ साथ कैकेयी 

खुद को भी अमर कर गई,

राम को सिर्फ राम न रहने दिया

रामनाम का जीवनमंत्र

कण कण में बसा गई,

राम को राजा राम के बजाय

मर्यादा पुर्षोत्तम राम बना गई,

कलंक का बोझ उठाया फिर भी

दुनिया राममय कर गई

अयोध्या को अयोध्या धाम कर गई

जगत में नाम कर गई।

◆ सुधीर श्रीवास्तव

      गोण्डा(उ.प्र.)

    8115285921

©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

हाय रे गंतव्य जीवन – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

November 22, 2021

 हाय रे गंतव्य जीवन चली अचानक गई यहां से, जिसका कोई विश्वास नहीं, अंधकार में टटोल रहा हो , जैसे

लॉक लगा के रखना-अंकुर सिंह

November 22, 2021

 लॉक लगा के रखना चलो अब हम चलते है। ख्याल अपना रख लेना। किए मुझसे वादे पूरे कर मेरे यादों

मेरी काव्य धारा-डॉ हरे कृष्ण मिश्र

November 22, 2021

 मेरी काव्य धारा मेरी काव्य धारा में, डूबा प्रेम तुम्हारा है , रचना भी तुम्हारी है, प्रणय भी तुम्हारा है 

दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 दूसरा विकल्प ज्यादा पसंदीदा है सोशल  मीडिया के दुनिया में आगमन के बाद  आ गई है हम सबके हाथ एक

संत शिरोमणी नानक देव -डॉ इंदु कुमारी

November 22, 2021

 संत शिरोमणी नानक देव सिखों के प्रथम गुरु  संत शिरोमणी नानक देव बहाए प्रेम की  गंग सदैव प्रकाश पूंज फैलाने

प्यार की डोर-डॉ इंदु कुमारी

November 22, 2021

 प्यार की डोर हम सब जिनसे बँधे हुए  वो   है  प्यार   की  डोर वर्ना रिश्ते चटक  रहे है बिना   किये 

Leave a Comment