Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kahun kaise by Indu kumari

 कहूं  कैसे  मिलूं तो होंठ सट जाते हैं ऐसे रात के अधखिले फूल हो जैसे चाहकर भी वे हिल नहीं …


 कहूं  कैसे 

Kahun kaise by Indu kumari

मिलूं तो होंठ सट जाते हैं ऐसे

रात के अधखिले फूल हो जैसे

चाहकर भी वे हिल नहीं पाते

फिर तुमसे मैं कुछ कहूं  कैसे

पल-पल में झपकती है पलकें

इशारे में भी कहूं  तो    कैसे

कुछ सुनाने से पहले ही चले जाते

आखिर बात दिल की बताऊं कैसे

क्या होता है मेरे   दिल    में

दिल का हाल अपना सुनाऊं कैसे

तुम मेरे प्यार को समझते नादान

तुमसे सच्चा प्यार जताऊं कैसे

जाने तुम कैसे   जी लेते  हो

मैं जिऊं तो आखिर   कैसे

दिल तो तुम्हारा भला लगता है

फिर तुम्हें बेवफा कहूं  कैसे।

     स्व रचित

डॉ. इन्दु कुमारी हिन्दी विभाग मधेपुरा बिहार


Related Posts

क्रिसमस-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 25, 2021

क्रिसमस! क्रिसमस है  एक प्रसिद्ध त्योहार, सैंटा क्लॉस जी का हर बच्चा करता है इंतजार, 25 दिसंबर को मनाया जाता

तुम देना साथ सदा-नंदिनी लहेजा

December 23, 2021

तुम देना साथ सदा। नन्हा सा अंकुर बन जब, मैं मातृगर्भ में आया। मेरे अस्तित्व को सींचा माँ ने, था

ठिठुरता ठंड – डॉ इंदु कुमारी

December 23, 2021

ठिठुरता ठंड कंपकपाती ये रातें सिसकती रही यादेंठिठुरते हुए ठंड की बीत गयी रे बचपनआ गयी बर्फीली सीजर्रा -जर्रा हिलानेथरथराती

मशवरा- R.S.meena indian

December 23, 2021

मशवरा इशारों में मुझकों बुलाती है,मगर जाने का नही ।अपना उश्शाक बनाती हैं,उधर जाने का नही ।। इश्क़ में खो

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी- सुधीर श्रीवास्तव

December 23, 2021

 पुण्य तिथि विशेषआचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी दौलतपुर ग्राम रायबरेली जनपद मे पाँच मई अठारह सौ चौसठ मेंपं. रामसहाय द्विवेदी के

कविता-नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 23, 2021

नई शुरुआत! सब बिखर गया तो क्या हुआ,समेटने का दम रखते हैं,चलो करे नई शुरुआत,जिंदगी में फिर से नई शुरूवात

Leave a Comment