Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kahin jashn kahin hatasha by Anita Sharma

 कहीं जश्न,कहीं हताशा* समय परिवर्तित होता तो है, पर…इतना ? किसी देश में जश्न आजादी, तो कहीं परतंत्रता छाई।   …


 कहीं जश्न,कहीं हताशा*

Kahin jashn kahin hatasha by Anita Sharma

समय परिवर्तित होता तो है,

पर…इतना ?

किसी देश में जश्न आजादी,

तो कहीं परतंत्रता छाई।

      कब मानवता जाग्रत होगी जग में,

      कब समन्वय होगा सब में?

      कब शान्ति का ध्वजारोहण होगा,

      सब सम्मान से जीवन जियेगे।

एक स्वतंत्रता प्यार भरी हो ,

विश्व कुटुम्ब की भावना हो।

समानता का अधिकार हो ,

कर्तव्यों की बात हो ।

       –अनिता शर्मा झाँसी

      –मौलिक रचना


Related Posts

पहले जैसा नहीं रहा- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

पहले जैसा नहीं रहा क्यों हर रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा ?हाँ सोचती हूँ मैं अक्सर ही कि-क्यों हर रिश्ता

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 13, 2022

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है

हाशिये पर इतिहास- शैलेंद्र श्रीवास्तव

March 26, 2022

हाशिये पर इतिहास ब्रह्म राक्षसबहुत छल प्रपंची होता हैवह कितनो का अंतरंग होता हैवह न किसी धर्म न पंथ न

अनेकता में एकता की नगर चौरासी-अक्षय भंडारी

March 26, 2022

अनेकता में एकता की नगर चौरासी अनेकता में एकता की नगर चौरासीहम सुनाते है एक ये प्यारी बात,ये है हमारी

रंगबिरंगा त्यौहार!-डॉ. माध्वी बोरसे

March 26, 2022

रंगबिरंगा त्यौहार! रंगो का त्योहर हे होली,खुशियों से भरदे सबकी झोली,पकवान या मिठाई के जेसे,मीठी हो जाए सब की बोली।

PreviousNext

Leave a Comment