Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kahin jashn kahin hatasha by Anita Sharma

 कहीं जश्न,कहीं हताशा* समय परिवर्तित होता तो है, पर…इतना ? किसी देश में जश्न आजादी, तो कहीं परतंत्रता छाई।   …


 कहीं जश्न,कहीं हताशा*

Kahin jashn kahin hatasha by Anita Sharma

समय परिवर्तित होता तो है,

पर…इतना ?

किसी देश में जश्न आजादी,

तो कहीं परतंत्रता छाई।

      कब मानवता जाग्रत होगी जग में,

      कब समन्वय होगा सब में?

      कब शान्ति का ध्वजारोहण होगा,

      सब सम्मान से जीवन जियेगे।

एक स्वतंत्रता प्यार भरी हो ,

विश्व कुटुम्ब की भावना हो।

समानता का अधिकार हो ,

कर्तव्यों की बात हो ।

       –अनिता शर्मा झाँसी

      –मौलिक रचना


Related Posts

bal shramik diwas par kavita by anita sharma

June 23, 2021

 बाल श्रमिक दिवस परकविता  कितनी मजबूर जिन्दगी , मासूम उम्र में मेहनत करते। कचरा बीनने को मजबूर , कितने मैले

kavita anubandh by dr hare krishna mishra

June 23, 2021

 अनुबंध परंपरागत अनुबंध हमारा, कब टूटेगा था ज्ञात नहीं , सहज सरल जीवन जिया है हमको है अभिमान  नहीं।   ।।

kavita sawan ki bund by kamal sewani

June 23, 2021

सावन की बूँद सावन की रिमझिम बूँदें जब ,   झरतीं नील गगन से ।  शस्य रूप अवलोकित होता ,   वसुधा

kavita-wo jamana by sudhir srivastav

June 23, 2021

वो जमाना आज जब अपनेपिताजी की उस जमाने कीबातें याद आती हैं,तो सिर शर्म से झुक जाता है।माँ बाप और

kavita-haiwaniyat by antima singh

June 23, 2021

 कविता-हैवानियत कमजोर जानकर किसी को क्युं सताते हैं लोग, मासूम दिलों पे पत्थरों की बौछार क्युं चलाते हैं लोग, कभी

kavita kal ki mahabharat aur aaj ki mahabharat by saurabh

June 23, 2021

“कल की महाभारत और आज की महाभारत” महाभारत के सभी पात्र, अब तो घर ही में है,घृतराष्ट्र, दुर्योधन, शकुनि, सब

Leave a Comment