Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

Kahan hai swatantrata by jayshree birmi

 कहां है स्वतंत्रता खुशी मानते है हम दुनिया भरकी क्योंकि अब आया हैं स्वतंत्रता का ७५ साल, यानी कि डायमंड …


 कहां है स्वतंत्रता

Kahan hai swatantrata by jayshree birmi

खुशी मानते है हम दुनिया भरकी क्योंकि अब आया हैं स्वतंत्रता का ७५ साल, यानी कि डायमंड जुबिली मना रहे है।कितना पाया उसका हिसाब तो शायद सभी के पास होगा वह भी पूरी गिनती के साथ।किंतु खोया क्या हैं इसका हिसाब भी करलें आज।

जज १४ अगस्त १९४७ को पाकिस्तान के आजाद होने से पहले ही लोगों ने पलायन करना शुरू कर ही दिया था।अपनी बसी बसाई गृहस्थी से पता नहीं क्या क्या उठा पाए थे? शायद जन बचाने की दौड़ में खुद को और बच हो को ही साथ ले पाए थे।छोड़ कर वह जानी पहचानी गलियां नई गलियों में बसने कोई पैदल तो कोई बस या रेल में जन बचाने के लिए दौड़े थे।अगर कोई उस वक्त का विस्तापित मिल जाएं तो जरा बात करके देखना,और रोक सकें तो अपने आंसू रोक के देखना।वो जो विनाशकारी मंजर था वह कैसे भुल पाएंगे आज आजादी मानते हुए।आज ७५ साल हो गए खूब प्रगति की हैं देश ने किंतु कभी देखा हैं उन झोपड़पट्टियों को जो कभी फ्लाईओवर के नीचे कभी फुटपाथ पर जहां भी खाली जगह मिले वह प्लास्टिक की चद्दरे लगा अपना डेरा डाल देते हैं,गर्मी,धूप बारिश सब की मार सहते जीवन गुजार देेते हैं।न हीं उनके बच्चों को पढ़ाई नसीब होती हैं और न पौष्टिक खाना।प्याला भर दूध भी दिन में एकबार भी नसीब नहीं होता।

और दूसरी तरफ बड़े बड़े वातानुकूलित भवनों में भांति भांति के भोजन करने वाले हैं।दो तीन लोगों के लिए बत्तीस सब्जी और पेनतिस पकवान बनते हैं जो शायद खाने से ज्यादा फेंका जाता हैं।अन्न का व्यय करने वालों को जरा भी शर्म नहीं आती की वे अन्नदेव का अपमान कर रहे हैं।वो बड़ी बड़ी गाड़ियों में महंगी गाड़ियों में पालतू कुत्ते बिल्लियों को बिठा सैर को जाते हैं।

वहीं जो सामाजिक असमानता हैं ,वही एक चुभन वाला कांटा,एक दाग हैं हमारी स्वतंत्रता के माथे पर।

यही सामाजिक असमानता की वजह से ही गुनहाखोरी,चोरी चाकरी को बढ़ावा मिलता हैं।सामाजिक सुरक्षा कम होती जाती हैं ।

ऐसे में सरकार को भी कानून बना यह सामाजिक अंतर को पाट देना चाहिए।

जहां समकक्षता होगी तो असंतोष कम हो जायेगा और सामाजिक संतुलन बढ़ेगा।जिस दिन न कोई अति गरीब और न ही कोई अति अमीर रहेगा उस दिन हमे सच ही स्वतंत्रता प्राप्त होगी।

तभी हम सच्चे मायने में भारत माता की जय बोल पाएंगे।जिस मां की संतान भूखी सोती हैं उसे चैन कहा से होगा।ठीक वैसे ही भारत माता को भी चैन मिलेगा जब सभी १२५ करोड़ भारतवासी भरपेट खाना ,रहने को मकान और तन ढकने के लिए पर्याप्त कपड़े पा जायेंगे।

इसी आशा में–

 भारत माता की जय,

जय हिंद 🇮🇳🇮🇳

जयश्री बिर्मी

सेवा निवृत्त शिक्षिका

अहमदाबाद


Related Posts

Zindagi choti kahani bandi by Kashmira singh

September 9, 2021

 जिंदगी छोटी कहानी बड़ी । हमारे चारो तरफ कहानियों का जाल सा फैला हुआ है । यह दीवार पर टँगी

Langoor ke hath ustara by Jayshree birmi

September 4, 2021

लंगूर के हाथ उस्तरा मई महीने से अगस्त महीने तक अफगानिस्तान के लड़कों ने धमासान मचाया और अब सारे विदेशी

Bharat me sahityik, sanskriti, ved,upnishad ka Anmol khajana

September 4, 2021

 भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और बुद्धिमता का भंडार रहा है – विविध संस्कृति, समृद्धि, भाषाई और साहित्यिक विरासत

Bharat me laghu udyog ki labdhiyan by satya Prakash Singh

September 4, 2021

 भारत में लघु उद्योग की लब्धियाँ भारत में प्रत्येक वर्ष 30 अगस्त को राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस मनाने का प्रमुख

Jeevan banaye: sekhe shakhayen by sudhir Srivastava

September 4, 2021

 लेखजीवन बनाएं : सीखें सिखाएंं      ये हमारा सौभाग्य और ईश्वर की अनुकंपा ही है कि हमें मानव जीवन

Bharteey paramparagat lokvidhaon ko viluptta se bachana jaruri

August 25, 2021

भारतीय परंपरागत लोकविधाओंं, लोककथाओंं को विलुप्तता से बचाना जरूरी – यह हमारी संस्कृति की वाहक – हमारी भाषा की सूक्ष्मता,

Leave a Comment