Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, aatmkatha, lekh

Kahan hai khalnayikayein

 कहां हैं खलनायिकाएं एक जमाने में फिल्म देखने जाना ही मनोरंजन का साधन था।देखनेवाले तो हर शुक्रवार को आने वाली …


 कहां हैं खलनायिकाएं

Kahan hai khalnayikayein

एक जमाने में फिल्म देखने जाना ही मनोरंजन का साधन था।देखनेवाले तो हर शुक्रवार को आने वाली फिल्म का पहला दिन ,पहला शो देखने का रिकॉर्ड बनाते थे।उन दिनों अभिनेत्रियां भी अपनी एक मर्यादा में रह कर अभिनय करती थी।फिल्मों का भी अपना एक क्रम था,और उसी हिसाब से पत्रों को पसंद किया जाता था।कॉमेडी भी भरपूर होती थी और बदमाशी भी,खलनायिका और खलनायकों द्वारा।

१९३० –४० में से फिल्मों में खलनायिकाओं का अभिनय शुरू हुआ ऐसा कह सकते हैं।उन दिनों कुलदीप कौर थी खलनायिका, जो सुंदर तो थी ही और हीरो को फसाने में दक्ष थी। वैसे भी खलनायिका की वजह से फिल्म देखने के दरम्यान उत्सुकता बनी रहती थी।इसके बाद कुलदीप जैसी कई खलनायिकाएं आई जैसे कि नादिरा,ललिता पवार,मनोरमा,शशिकला, हेलन ,बिंदु,अरुणा ईरानी,जयश्री टी,मीना टी,पद्मा खन्ना,लक्ष्मी छाया,बेला बॉस,कई बार सोनिया साहनी,और एक दो बार मुमताज ने भी खलनायकी के रोल किए हैं।और भी कई खलनायिकायें एक दो फिल्मों में काम कर के कहां चली गई ये पता ही नहीं चला।इन के काम की वजह से पूरी फिल्म में ,अब क्या होगा ये उत्सुकता बनी रहती थी।उनका मुंह बना के बात करना ,खलनायिक तरीके से आंखे मटका के बोलना आदि अभी हम फिल्मों में नहीं देख पा रहे। बैड गर्ल्स को मिस कर रहे हैं हम।उनका अपने षड्यंत्रों को अंजाम  देने के लिए इख्तियार करे हुए तरीकें और बाद में ऊन्ही के विरुद्ध में परिणाम आना और फिर खिसियाई बिल्ली का खंभा नोचना आदि  फिल्म की कहानी का एक रसप्रद हिस्सा हुआ करता था।दुष्कृत्य कर उसका आनंद लेती हुई खलनायिका खुश हो जाया करती थी।सामान्यत: वे खलनायक के साथ मिलकर अभिनेत्रियों से ईर्षा वश खलनायक को ही अभिनेतट्रियों के नजदीक जाने में मदद कर अपना भी बुरा कर लिया करती थी।कई बार खलनायिका कॉमेडी भी करती थी।खास करके ललिता पवार की आंखें मटकाना ,एक आंख छोटी करके ,बहुत ही पसंद की जाती थी।खलनायिका गुंडों के बीच रहकर,या बाजारू स्त्री बनकर रहती थी और पूरी फिल्म में दांव पेंच का खेल रचने के बाद अंत बहुत ही बुरा होता था।कई बार वह अभिनेत्रियों की बहन,सहेली या पड़ोसन हुआ करती थी।कई बार सास या नन्द भी हुआ करती थी जो बहु या भाभी का जीना हराम कर देती थी किंतु अंत में उने बेटे या भाई के सामने पोल खुल जाने से शर्मिंदगी का सामना कर हार जाया करती थी।

 पहलें फिल्मों में डांसर्स की भी एक जगह होती थी,कॉमेडियन भी की अति महत्व की भूमिकाएं होती थी।ज्यादातर वे अभिनेता के मित्र हुआ करते थे।अब फिल्मों में कहानीयों का ढांचा ही बदल गया हैं।एक हीरो और एक हीरोइन वाली कहानियों पर ही फिल्म का आधार रहने लगा हैं।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

भारत की पड़ोस और विदेश नीति शांति-उन्मुख रही है

April 25, 2022

 भारत की पड़ोस और विदेश नीति शांति-उन्मुख रही है  भारत के पड़ोस में मची सियासी उठापटक और आर्थिक आपातकाल –

पड़ोसी देश के पीएम द्वारा भारत की भरपूर प्रशंसा!!!

April 25, 2022

 पड़ोसी देश के पीएम द्वारा भारत की भरपूर प्रशंसा!!!  पड़ोसी मुल्क से रिश्ते ख़राब होने के बावजूद सियासी संकट के

निर्णय क्षमता को विकसित करना सफ़ल जीवन की कुंजी

April 25, 2022

 निर्णय क्षमता को विकसित करना सफ़ल जीवन की कुंजी  जीवन में समय के साथ अपडेट रहने से निर्णय क्षमता विकसित

आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) संशोधन बिल 2022

April 25, 2022

 आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) संशोधन बिल 2022 संसद के दोनों सदनों में पास अब कानून बनेगा  थर्ड डिग्री समाप्त कर

बढ़ती उम्र का तकाज़ा

April 25, 2022

 बढ़ती उम्र का तकाज़ा बढ़ती उम्र के साथ सतर्कता का ध्यान रखना ज़रूरी – बुढ़ापा जवानी नहीं लाता, जवानी बचपन

झूलेलाल जयंती चेट्रीचंड्र महोत्सव 2 अप्रैल 2022 पर विशेष

April 25, 2022

 झूलेलाल जयंती चेट्रीचंड्र महोत्सव 2 अप्रैल 2022 पर विशेष  सदियों से मनाया जाने वाला चेट्रीचंड्र पर्व सद्भावना,भाईचारे एकता, अन्याय पर

Leave a Comment