Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kab tu bada huwa re bhaiya by vijay Lakshmi Pandey

 कब तू बड़ा हुआ रे भैया…!!! अम्माँ तुम   कहती  थी  न, ये   तो   तेरा   छोटा  भैया। मैं भी तो इस …


 कब तू बड़ा हुआ रे भैया…!!!

Kab tu bada huwa re bhaiya by vijay Lakshmi Pandey

अम्माँ तुम   कहती  थी  न,

ये   तो   तेरा   छोटा  भैया।

मैं भी तो इस नन्हें दीप  की,

जी भर लेती ख़ूब  बलैया।।

दीदी दीदी कहकर मुझको,

सारा     दिन      उलझाए।

मिट्टी के ये    खेल-खिलौनें,

ज़िद     करके    बनवाए।।

परियों   की  दुनियाँ  प्यारी,

गोलम -गप्पू  की कविताएँ।

मैं  बतलाती  मैं  समझाती ,

तुझको     ख़ूब     सुहाए।।

ये   बातें  वो   बातें  दीदी,

बक -बक   करता  जाये।

मैं थक जाती मैं  घबराती,

पर  मक्खन ख़ूब लगाये।।

कितनीं डांट सुनी है मुझसे,

पर नटखट पन दिखलाये ।

मेरे   डांट   लगाते   ही तू ,

चरणों   में   झुक    जाएँ।।

उठा  बैठ  करवा  ले दीदी,

पर    नाराज   न     होना।

मैं तो   तेरा   नन्हा    भैया,

कुछ   खानें  को   दे ना ।।

जब   मैं      ब्याही      गई,

मुझे तुम नन्हा सा दीखता।

पर,जहाँ-जहाँ  रस्में   तेरी, 

तू आगे-आगे     मिलता ।।

छोटा सा  भैया बनकर तू,

साथ-साथ     रहता   था।

कैसी दीदी  की  कगरी है,

मन ही   मन  बुनता था।।

और पिता   के  आगे  तूने,

एक       गुहार      लगाई।

सच कहता हूँ दीदी बिन मैं,

पानीं   बिन   मर    जाऊँ।।

एक दीप चमका तू ऐसा ,

सूरज     भी   शरमाया ।

रहे    देखते  लाखों  तारे,

कान्हा   बनकर  आया ।।

आते -जाते  रहना  दीदी ,

ऐसा तेरा भाग्य  जगा दूँ।

दीदी  तू   मेरी   दीदी  है,

ऐसा मैं सम्मान दिला दूँ।।

अरसे बाद गई पीहर मैं,

धार-धार   आँसू  ढरके।

रे विधना ,हर घर में मेरे,

भैया सा   भैया  जनमे।।

यूँ तो अम्माँ -बाबूजी बिन,

घर सूना -सूना   दीखता ।

पर भैया   का  नेह -स्नेह ,

सम्मान बहुत ही मिलता।।

कब तू बड़ा हुआ रे भैया..??

इस “विजय” को बतला दे।

अम्माँ बाबूजी के जाने पर,

सब कुछ कैसे सह जाते।।

बहनों का अभिमान है भैया,

छोटा  बड़ा  कहाँ से  होता ।

आदर सादर वन्दन नमन में,

अंतर  कहीं नहीं   मिलता ।।

                  विजय लक्ष्मी पाण्डेय
                  एम. ए., बी.एड.(हिन्दी)
                  स्वरचित मौलिक रचना
                      एक आत्म मंथन
                      आजमगढ़,उत्तर प्रदेश


Related Posts

धरनी धर्म निभाना

April 19, 2023

धरनी धर्म निभाना साथ तेरा मिला जो मुझको,बिछड़ मुझसे अब न जाना।वपु रूप में बसों कही भी,चित्त से मुझे न

सिखाया जिंदगी ने बिन किताब

April 19, 2023

सिखाया जिंदगी ने बिन किताब खुद से अधिक किसी ओर को चाहनाहोता है खुद कि नज़र मे खुद के ही

शिक्षा की नींव ज्योतिबा फूले

April 10, 2023

शिक्षा की नींव ज्योतिबा फूले सन् 1827 को वो एक शिक्षा का मसीहा आया था।ज्योतिबा था नाम आपका,भार्या सावित्री को

बावीस संविधान सूचीगत भारतीय भाषाएं

April 10, 2023

 भावनानी के भाव  बावीस संविधान सूचीगत भारतीय भाषाएं बावीस सविंधान सूचीगत भारतीय भाषाओं से  नवोन्मेष उधमियों को सहायता मुहैया  कराने

है वादा। Kavita -hai waada

April 10, 2023

है वादा।  पढ़ो पर लिखो ज्यादा,बोलो पर सोचो ज्यादा,खेलो पर पढ़ो ज्यादा,आप सफल होंगे है वादा। खाओ पर चबाओ ज्यादा,रोइए

कविता –छात्र नेता, गोली और हत्या |kavita

April 6, 2023

” छात्र नेता, गोली और हत्या “ मैं नहीं कहता कि मुझे अपने ही मारेंगेमुझे अपनों पर पूरा भरोसा हैतब

PreviousNext

Leave a Comment