Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kab tak madhusudan duadenge by vijay Lakshmi Pandey

 कब तक मधुसूदन दौड़ेंगे….!!! कब तक   मधुसूदन दौड़ेंगे । द्रुपद सुता की लाज बचानें।। दरबार सजा  जब  कौरव का । …


 कब तक मधुसूदन दौड़ेंगे….!!!

Kab tak madhusudan duadenge by vijay Lakshmi Pandey

कब तक   मधुसूदन दौड़ेंगे ।

द्रुपद सुता की लाज बचानें।।

दरबार सजा  जब  कौरव का ।

फिर तात भ्रात किसको जानें।।

हो  गए यहाँ  धृतराष्ट्र  सभी ।

छिपकर  दुर्योधन  बैठा  हो ।।

वह  एक रहा   होगा  शकुनि ।

जब घर घर में शकुनि पैदा हो।।

धिक् !लाज नहीं आती तुमको ।

ऐसे   में    आँसू    चुनती  हो ।।

अरे !  तुम्हीं  जननीं जिसकी ।

भयभीत  उसी  से  होती  हो ।।

यह  नहीं तुम्हारी  किस्मत में।

तुम टूट टूट  कर  यूँ  बिखरो ।।

यह नहीं   तुम्हारी  फितरत में ।

संकुचित  भाव  और मौन बनो।।

तुम  भी    छाती   रखती  हो ।

झाँसी   वाली    रानी     का  ।।

तुम  भी   गरिमा  रखती    हो ।

लोपा  ,मुद्रा   और  गार्गी  सा ।।

तुम  सीता  हो खुद  को  जानो।

जो रावण  वध   कर   लौटी है ।।

तुम  दुर्गा   हो  पथ   पहचानो ।

जब     शस्त्र  उठे  शत्रु  काँपे ।।

तुम  काली हो बस  निडर बनो।

रण  में    उतरो   संहार   करो ।।

तुम लक्ष्मी  हो  नारायण की  ।

खुशहाल  विश्व  आबाद करो।।

तुम  विजय पताका ले  निकलो ।

खुद  से खुद  का अवलम्ब बनो ।।

साहस  ,शौर्य  और समता  से ।

नव युग  का    निर्माण    करो ।।

तुम  ममता  की  अद्भुत प्रतिमा।

खुद  से खुद  की पहचान करो ।।

जो  काँटे  चुभते  हों   पथ    में ।

उन  काँटों  को जड़  से  काटो  ।।

वह  प्रस्तर क्या  जो चढ़ा  भवन ।

तुम  सदा  भवन  की नींव  बनो ।।

विश्वास  करो    युग    बदलेगा  ।

यह बिगुल ,शंख  ,रण भेरी   है  ।।

तुम अबला  नहीं  सबल  नारी ।

केवल  जगनें    की     देरी   है ।।

तुम  एक अमिट अद्भूत प्रतिभा।

इस प्रतिभा  को साकार  करो  ।।

इतिहास रचो   तुम    एक नया ।

अपनीं  पहचान   में  रंग  भरो ।।

*************************

            विजय  लक्ष्मी पाण्डेय

            एम. ए., बी.एड

.(हन्दी)

स्वरचित मौलिक रचना

                    आजमगढ़, उत्तर प्रदेश


Related Posts

पैसे का खेल

June 24, 2022

 पैसे का खेल सुधीर श्रीवास्तव समय के साथ पैसा भी अब अपना रंग दिखाने लगा है, पैसे पर भी आधुनिकता

शादियाँ

June 24, 2022

 शादियाँ सुधीर श्रीवास्तव शादियां वास्तव में एक अनुबंध है दो परिवारों, दो दिलों का, जिसमें निभाई जाती हैं परंपराएं, धारणाएं,

माँ – तूम धन्य हो !

June 24, 2022

 माँ – तूम धन्य हो ! मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” माँ … तेरा प्यार – दुलार माँ तेरी ममता माँ ,तूने

मां आज भी याद है

June 24, 2022

 मां आज भी याद है मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” प्यार  -फटकार अम्मी का लाड-प्यार पापा की डाट-फटकार आज भी याद आती

गजल

June 24, 2022

 गजल मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” म्हारे वतन मे अमन-चैन बण्यो रैवै । आ प्रार्थना जणो-जणो करतो रैवै ।। घर – घर

बन्दा नवाज

June 24, 2022

 बन्दा नवाज        मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी” हर जर्रा – जर्रा उसका ही मोहताज है । हर जर्रे –

PreviousNext

Leave a Comment