Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

Just say it’s ok

 “Just say it’s ok” आजकल ऑनलाइन शोपिंग और बाहर का खाना खाने का शौक़ हम लोगों पर कुछ ज़्यादा ही …


 “Just say it’s ok”

Just say it's okआजकल ऑनलाइन शोपिंग और बाहर का खाना खाने का शौक़ हम लोगों पर कुछ ज़्यादा ही चढ़ा है, जिसकी वजह से घर-घर फ़टाफट खाना और सामान पहुँचाने वाली एप्स में जैसे प्रतियोगिता चल रही है। कोई आधे घंटे में पित्ज़ा पहुँचाने की एनाउंसमेंट करती है, तो कोई पंद्रह मिनट में तो कोई दस मिनट में। हम भूख के मारे जो सबसे कम समय में खाना डिलीवरी करते है ऐसी एप पर खाना ऑर्डर करते है। पर जब हम Zomato और Swiggy जैसे फूड एग्रीगेटर्स से अपना खाना ऑर्डर करते हैं और डिलीवरी बॉय हमारे दरवाजे पर समय पर नहीं पहुंचता तब हम देर से आने के लिए उसे ऐसे डांटते हैं जैसे उसने कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो, उनकी शिकायत कर देते है जैसे वह इंसान नहीं मशीन है। कई कंपनी हमारी शिकायत पर डिलीवरी ब्वाॅय को या तो नौकरी से निकाल देते है या सेलरी काट लेती है। उस पर कभी सोचा है आप बड़े घरों में बैठकर ऑर्डर देने में माहिर है पर उस नौकरी से उस लड़के का घर चलता है या स्कूल कालेज की फ़ीस निकलती है। महज़ छोटा समझकर किसीके साथ ऐसा व्यवहार अशोभनीय है। हर इंसान को अपना आत्मसम्मान प्यारा होता है।

ऑनलाइन शोपिंग में कई बार कुछ ग्राहकों का रवैया डिलीवरी ब्वॉयज़ के प्रति काफ़ी खराब होता है। सर्विस में कमी, उत्पाद के पहुंचने में देरी या सामान में खराबी का सारा गुस्सा डिलीवरी ब्वॉय पर उतरता है, जिसको शायद यह भी मालूम नहीं होता कि आपने मंगवाया क्या है।

हम लोगों में इतना पेशन, इतनी मानवता नहीं बची की उसके देर से आने का कारण जानें, उनसे पूछे कि क्यूँ देर हुई? हो सकता है किसी दुर्घटना की वजह से लेट हो गए हो, कोई हेल्थ इमरजेंसी आ गई हो या वह लड़क बिमार हो या ट्रैफिक जैम में फंसा हो। हम इतने स्वार्थी बन गए है की किसीकी मजबूरी का गलत फ़ायदा उठाने लगे है। समय पर खाना नहीं पहुँचा तो नौकरी बचाने के चक्कर में डिलीवरी ब्वोय कई बार एक्सिडेंट का शिकार बन जाते है, उनके हाथ पैर टूट जाते है या जान भी जा सकती है। सोचिए वह भी किसीके जिगर का टुकड़ा होता है, या हो सकता है घर में एक ही कमाने वाला हो अगर हमें जल्दी खाना पहुँचाने के चक्कर में उसके साथ अनहोनी हो जाती है तो क्या हम खुद को माफ़ कर पाएंगे। जब ऑनलाइन सुविधा नहीं थी तब हम सारी चीज़ें लेने खुद ही दुकानों और रैस्टोरेंट तक जाते थे उसमें समय लगता ही था। तो आज भी क्यूँ न थोड़ा इंतज़ार कर लें, देर से आने पर डिलीवरी ब्वाॅय से कारण पूछें, उसे पानी पिलाए और हंस कर कहें की it’s ok जिससे एक संदेश भी फैलेगा इंसान का इंसान हो भाईचारा। और it’s ok सुनते ही उस लड़के के चेहरे पर जो सुकून मुस्कुराएगा उसे देखकर खुद पर भी गर्व महसूस होगा। (so just say it’s ok)

भावना ठाकर ‘भावु’ (बेंगलोर)


Related Posts

राजनीति में महिलाएं का होना महत्वपूर्ण!

March 26, 2022

 राजनीति में महिलाएं का होना महत्वपूर्ण! “यत्र   नार्यस्तु   पूज्यन्ते ,  रमन्ते  तत्र   देवताष्।”    हमारी संस्कृति   में   नारी  सदा   ही 

क्या आप अपने बच्चों को टॉपर बनने के लिए फोर्स करते हैं?

March 26, 2022

क्या आप अपने बच्चों को टॉपर बनने के लिए फोर्स करते हैं? जी अगर आप अपने बच्चे को, टॉपर बनने

कॉर्पोरेट में महिलाएं!-डॉ. माध्वी बोरसे!

March 26, 2022

कॉर्पोरेट में महिलाएं! हमारी काल्पनिक कथाओं ने बताया कि महिला अपने दस हाथों से परिवार का नेतृत्व करती है। दो

अनुभव का खजाना…-तमन्ना मतलानी

March 26, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात अनुभव का खजाना… हम अपने जीवन में विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं। इन

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 मार्च 2022 – न्यायसंगत डिजिटल फाइनेंस

March 25, 2022

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 मार्च 2022 – न्यायसंगत डिजिटल फाइनेंस उपभोक्ताओं में जागरूकता सृजित करने 14 से 20 मार्च

शांत और परोपकारी स्वभाव सुखी जीवन का मूल मंत्र!!

March 25, 2022

शांत और परोपकारी स्वभाव सुखी जीवन का मूल मंत्र!! स्वयं को माचिस की तीली बनाने की बजाय, शांत सरोवर बनाएं

Leave a Comment