Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Jivan ko jeena by Anita Sharma

 “जीवन को जीना “ जीवन ने सिखलाया है, जीवन को जीना है कैसे? सुख के पीछे भागोगे तो, दुख चिंता …


 “जीवन को जीना “

Jivan ko jeena by Anita Sharma

जीवन ने सिखलाया है,

जीवन को जीना है कैसे?

सुख के पीछे भागोगे तो,

दुख चिंता ही पाओगे ।

जो प्राप्त है वही पर्याप्त है,

प्रशंसा में फूलो नहीं ,

आलोचना से घबराना कैसा?

जीवन तो बस एक संघर्ष है,

समस्या तो आयेगी ही.

समाधान भी मिलेगे ही।

फिर चिंता फिक्र करें ही क्यों?

जीवन के साथ खुश रहना है।

एक मूलमंत्र पाया है,

अतीत बीत गया छोड़ो ।

भविष्य में जो है आयेगा ही ,

क्या घबराना?क्यों रोना है।

जीवन को हंसकर जीना है।

——अनिता शर्मा झाँसी
——-मौलिक रचना


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment