Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

jitendra kabir ki kavitayien champa hp

जितेंद्र  कबीर की कविताएँ   इंसान को इंसान से तो मिलाया होशो-हवास में अक्सर दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ नफरत …


जितेंद्र  कबीर की कविताएँ 

 इंसान को इंसान से तो मिलाया

jitendra kabir ki kavitayien champa hp

होशो-हवास में अक्सर

दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ

नफरत उगलने वाले कई लोगों को,

नशे की हालत में उनके साथ ही

गलबहियां डाले गीत गाते 

जब देखा मैंने तो ख्याल आया

कि नशा लाख बुरा हो अपनी जगह लेकिन

जो बड़े से बड़ा महान इंसान न कर पाया

वो इस नशे ने कर दिखाया,

कुछ समय के लिए ही सही

धर्म भुला इंसान को इंसान से तो मिलाया।

होशो-हवास में अक्सर

दूसरी जाति के लोगों के साथ बैठकर

खाना खाने से परहेज करने वाले 

कई लोगों को,

नशे की हालत में उनके साथ ही

एक थाली में खाना खाते 

जब देखा मैंने तो ख्याल आया

कि नशा लाख बुरा हो अपनी जगह लेकिन

जो भेद सदियों से इंसान न मिटा पाया

वो इस नशे ने मिटाया,

कुछ समय के लिए ही सही

जाति भुला इंसान को इंसान से तो मिलाया।

                                      जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314

 आस्था और विश्वास के नाम पर

सदियों से इंसान का शिकार

बनता रहा है जानवर,

जीभ का स्वाद व पेट की भूख

मूल में रही इन हत्याओं के पीछे

लेकिन जायज ठहराता रहा है इन्हें 

इंसान अक्सर कभी किसी

परम्परा के नाम पर तो कभी

आस्था-विश्वास के नाम पर।

वैसे देखा जाए तो

बहुत सारे जीव हैं इस सृष्टि में

अपना पेट भरने के लिए

अपने से कमजोर जीवों पर निर्भर

लेकिन लेते नहीं हैं कभी वो

किसी जीव की जान

अपने इष्ट देवता को प्रसन्न करने

के नाम पर या फिर किसी

धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर।

सिर्फ इंसान में ही है यह प्रवृत्ति

कि वो अपने द्वारा की गई हत्याओं को

लाजमी बताता है 

कभी शौक पूरा करने के नाम पर

तो कभी अपने अस्तित्व को

बचाए रखने के नाम पर,

कभी अपनी जरूरतों के नाम पर

तो कभी अपने रीति- रिवाजों को 

बनाए रखने के नाम पर।

                                 जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

नगाड़े सत्य के बजे |Nagade satya ke baje

December 11, 2022

 नगाड़े सत्य के बजे बजे झूठ पर तालियां,केवल दिन दो-चार।आखिर होना सत्य ही,सब की जुबां सवार।। सब की जुबां सवार,दौड़ता

मत करिये उपहास | mat kariye uphas

December 10, 2022

मत करिये उपहास अपना बोया ही मिले,या कांटें या घास।बे-मतलब ना बोलिये,मत करिये उपहास। मत करिये उपहास,किसी का जान-बूझकर।निकले हर

भ्रष्टाचार की पोल खोलते रहेंगे| bhrastachar ki pol kholte rahenge

December 10, 2022

 यह  व्यंग्यात्मक कविता वर्तमान में असफ़ल हुए उम्मीदवारों और पार्टी के भाव कविता के माध्यम से प्रस्तुत है। व्यंग्य कविता–भ्रष्टाचार

भारत माँ की पीर| bharat ma ki peer

December 10, 2022

भारत माँ की पीर भारत के गणतंत्र की,ये कैसी है शान ।भूखे को रोटी नहीं,बेघर को पहचान ।। सब धर्मों

Kavita–फितूर| Fitoor

December 10, 2022

कविता : फितूर सुना है बड़े मशहूर हो गए हो,क्या इसलिए इतनी दूर हो गए हो ! हर बात चुभती

अवैध रिश्ते| Awaidh rishte

December 10, 2022

अवैध रिश्ते रिश्तों के दरमियानकुछ दगाबाज पलते जो अपनों को ही अंधेरे में रख हर वक्त छलते।। अवैध रिश्ते कहां

PreviousNext

Leave a Comment