Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Jindagi bhar by siddharth bhar

 जिंदगी भर जमाने ने दी है तोहमत की दौलत ,इसको समेटे रहो जिंदगी भर। सफाई जो कर दोगे जेहन का …


 जिंदगी भर

Jindagi bhar by siddharth bhar

जमाने ने दी है तोहमत की दौलत ,इसको समेटे रहो जिंदगी भर।

सफाई जो कर दोगे जेहन का अपने ,रह न जाएगी थोड़ी कमी भर।

परवाह जिस दिन कर लोगे अपना,खुशियां मिलेगी तुमको जमी भर।

लोगों ने दूजे के बारे में क्या सोचा,करनी है उनको अपनी बन्दगी भर।

ठोकर लगाकर चल देंगे झट से,लगे थे जिसके लिए जिंदगी भर।

बुरे दौर में कौन होता है अपना, न देखेगा कोई तुमको नजर भर।

तेल लेने जाने दे इन बातों को,तूँ बस अपने अंदर थोड़ा असर भर।

परछाइयां भी होती हैं अक्सर पराई, इनमें अपनी मस्ती की थोड़ी लहर भर।

जर्रे जर्रे में नाम हो बस तुम्हारा, मेहनत को अंदर इस कदर भर।

-सिद्धार्थ पाण्डेय


Related Posts

मदर्स डे विशेष -माँ की दुआएं

May 6, 2022

मदर्स डे विशेष माँ की दुआएं घर से सफर करने निकलना हो । माँ को जहन में रख निकला करो

कविता-मां ही जन्नत

May 6, 2022

कविता-मां ही जन्नत न मैं मंदिर पुजू न मस्जिद और न ही गुरूद्वारा,मां के चरणों में ही समाई है देखो

कविता-समाज में और जागरूकता लाए !

May 6, 2022

समाज में और जागरूकता लाए ! समाज में जागरूकता लाए,सभी को शिक्षित बनाए,बेटियों को बराबरी का दर्जा दिलाए, समाज में

कविता – कोयले की किल्लत

May 6, 2022

कविता -कोयले की किल्लत कोयले नें राजनीतिक माहौल में गर्मी लाई कमीं दूर अपनी आइडिया समस्याएं बतलाईअंतरराष्ट्रीय बाजार की बात

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ”

May 4, 2022

मुस्कान के मरहम से नासूरों को सजाती हूँ सुकून को संभालना आसान नहीं बड़े नाज़ों से पालती हूँ, ज़ख़्मों के

कविता-आपनो राजस्थान!

May 2, 2022

 आपनो राजस्थान! रेतीली मरुस्थलीय भूमि,ऊंट पर बैठकर सवारी, जीवंत संस्कृति,जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है विशिष्ट पहचानम्हारों रंगीलों

PreviousNext

Leave a Comment