Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Jindagi bhar by siddharth bhar

 जिंदगी भर जमाने ने दी है तोहमत की दौलत ,इसको समेटे रहो जिंदगी भर। सफाई जो कर दोगे जेहन का …


 जिंदगी भर

Jindagi bhar by siddharth bhar

जमाने ने दी है तोहमत की दौलत ,इसको समेटे रहो जिंदगी भर।

सफाई जो कर दोगे जेहन का अपने ,रह न जाएगी थोड़ी कमी भर।

परवाह जिस दिन कर लोगे अपना,खुशियां मिलेगी तुमको जमी भर।

लोगों ने दूजे के बारे में क्या सोचा,करनी है उनको अपनी बन्दगी भर।

ठोकर लगाकर चल देंगे झट से,लगे थे जिसके लिए जिंदगी भर।

बुरे दौर में कौन होता है अपना, न देखेगा कोई तुमको नजर भर।

तेल लेने जाने दे इन बातों को,तूँ बस अपने अंदर थोड़ा असर भर।

परछाइयां भी होती हैं अक्सर पराई, इनमें अपनी मस्ती की थोड़ी लहर भर।

जर्रे जर्रे में नाम हो बस तुम्हारा, मेहनत को अंदर इस कदर भर।

-सिद्धार्थ पाण्डेय


Related Posts

तर्क या कुतर्क- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

तर्क या कुतर्क जंग के समर्थन मेंकिसी के तर्कमुझे तब तक स्वीकार नहींजब तक वो खुद सपरिवारउस जंग में कूद

मौत की विजय- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

मौत की विजय दुनिया के सभी युद्धों मेंपराजय जीवन कीऔर विजय मौत की होती है,शक्तिशाली होने का भ्रमपाले बैठा है

जनता जाए भाड़ में- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

जनता जाए भाड़ में देशभक्ति की आड़ मेंकुछ लोगों ने अपने लिए जुटाईसारी सुख-सुविधाएं,बाकी बची जनता सब वस्तुओं परटैक्स भर-भरकरझोंकती

कितना विरोधाभास है?- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

कितना विरोधाभास है? कितना विरोधाभास हैइंसान की फितरत में भी,अपनी हर मुसीबत मेंईश्वर का साथ पाने के लिएप्रार्थना करेगा भी

यह अवश्यंभावी है-जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

यह अवश्यंभावी है जिस समाज में कलाकारोंका समर्पणकला की उत्कृष्टता के लिए कमऔर उससे होने वालीकमाई व शोहरत पर ज्यादा

प्रचार से परे है सच्चाई- जितेन्द्र ‘कबीर’

March 25, 2022

प्रचार से परे है सच्चाई कानून के राज कीडींग हांकी जा रही है आजकल बहुत,लेकिन इस मामले मेंहत्या, बलात्कार, दबंगई

Leave a Comment