Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Jhutha bhram by Jitendra Kabir

 झूठा भ्रम रोक नहीं पाते जब तुम  दुनिया के सब मजलूमों  पर होने वाले ज़ुल्म-ओ-सितम  तो फिर तुम्हारे ‘दुखहर्ता’ होने …


 झूठा भ्रम

Jhutha bhram by Jitendra Kabir

रोक नहीं पाते जब तुम 

दुनिया के सब मजलूमों 

पर होने वाले

ज़ुल्म-ओ-सितम 

तो फिर तुम्हारे ‘दुखहर्ता’ होने का

झूठा भ्रम क्यों पाल लूं मैं?

जब फलने-फूलने देते हो

अपनी आंखों के सामने 

दुनिया में तुम 

अनेकानेक अनाचारों को,

तो फिर तुम्हारे ‘दिव्यद्रष्टा’ होने का

झूठा भ्रम क्यों पाल लूं मैं?

पूर्वजन्मों के फल के नाम

पर कभी और कभी

भाग्य के नाम पर मजलूमों

का शोषण करने वालों पर

अगर तेरा कोई बस नहीं,

तो फिर तेरे ‘सर्वशक्तिमान’ होने का

झूठा भ्रम क्यों पाल लूं मैं?

 जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति- अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

बलात्कार

June 24, 2022

 बलात्कार डॉ. इन्दु कुमारी  दरिंदगी की पहचान है  समाज का अभिशाप है  गंदगी की अंबार है  संकुचित विचारों का  गंदी

पृथ्वी दिवस

June 24, 2022

 पृथ्वी दिवस डॉ. इन्दु कुमारी  वसुंधरा को आइए  पेड़ों से सजाइए  वन बागों से इस धरा पर  जीवन की फसलें

प्रकृति के आंचल

June 24, 2022

 प्रकृति के आंचल डॉ. इन्दु कुमारी  प्रकृति हमारी हम प्रकृति के  सजाएंगे हम तो पाएंगे हम  लगाएंगे हम खाएंगे हम 

बुढ़ापे की मुंडेर

June 24, 2022

 बुढ़ापे की मुंडेर डॉ. इन्दु कुमारी  जन्म लिए बचपन बीते  खुशियों के होंठ खिले  बचपन के छोटे पौधे  फूल रूप

बेटी हुई

June 24, 2022

 बेटी हुई  डॉ. इन्दु कुमारी धीमी आवाज में  कहते बेटी हुई।  पापा देखो तेरी बेटी  आईपीएस की  टॉपर हुई। जिसका

मेघा रे

June 24, 2022

 मेघा रे डॉ. इन्दु कुमारी  मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे  मेरे संदेश को ले जाना रे   जिन राहों

PreviousNext

Leave a Comment