Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

International day of tolerance

आओ मिलकर सहिष्णुता के भाव को मज़बूत करें सहिष्णुता हमारी दुनिया की संस्कृतियों की समृद्ध विविधता, अभिव्यक्ति के रूपों और …


आओ मिलकर सहिष्णुता के भाव को मज़बूत करें

सहिष्णुता हमारी दुनिया की संस्कृतियों की समृद्ध विविधता, अभिव्यक्ति के रूपों और मानव होने के तरीकों का सम्मान, स्वीकृति और प्रशंसा है, सराहनीय थीम – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर बढ़ते हिंसक चरमपंथ के इस युग में मानव जीवन के लिए एक बुनियादी अपेक्षा की जरूरत है, जो हम सदियों पूर्व मानवीय गुणों में समाहित प्राप्त होते थे, परंतु वक्त के परिवर्तित होते माहौल में उन मानवीय गुणों का दौर भी धीरे-धीरे परिवर्तित होते चला गया जिसमें माननीय हिंसा, द्वेष, भेदभाव, मनमुटाव, गुस्सा नकारात्मक प्रतिद्वंदिता, मानवीय तालमेल का अभाव, दूसरों को परिस्थितियों के अनुसार नीचा दिखाने की प्रवृत्ति दूसरे की टांग खींचना दिनों दिन बढ़ती जा रही है इसलिए हम सब को मिलकर सदियों पूर्व वाले मानवीय गुणों को वापस लाना है, जिससे फ़िर वोही आपसी सहयोग मानवता परोपकार प्रोत्साहन सज्जनता, कर भला तो हो भला निस्वार्थ और सहिष्णुता सहनशीलता उदारता जैसे अनेकों गुणों को फ़िर तीव्रता से माननीय हृदय मे विशालता से वापस लाने का दृढ़ संकल्प करना है और हम सब एक हैं के नारे की गूंज का अभियान चलाना होगा। चूंकि 16 नवंबर 2022 को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस है, जो मानवीय जीवन के लिए बुनियादी अपेक्षा की विशेषता सहिष्णुता है। इसलिए आज हम इस मानवीय अनमोल गुण पर विशेष चर्चा करेंगे कि आओ मिलकर सहिष्णुता के भाव को मजबूत करें।
साथियों बात अगर हम सहिष्णुता सहनशीलता और शांति के मार्ग को अपनाने के प्रोत्साहन के कारणों की करें तो आज हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहां ग्रह पर हमारे साथी देशवासियों के बीच शांति और सौहार्दपूर्ण जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। राजनीतिक नकारात्मक प्रतिशोध भावना का बढ़ते जाना, धार्मिक कट्टरता, सांप्रदायिकता ध्रुवीकरण कोविड महामारी के बाद उत्पन्न स्थिति, जिंदगी की जटिलताएं और गिरता मानवीय आचरण, बढ़ता राजनीतिक द्वेष इत्यादि अनेक कारणों से आज मानवीय जीवन में सहिष्णुता की अत्यंत आवश्यकता आन पड़ी है जिसके लिए हमें आज न केवल इस वर्ष 16 नवंबर 2022 को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस को गंभीरता से जनजागरण कर मनाना है बल्कि वर्ष के प्रतिदिन इस दिवस को मनाने का संकल्प भी लेना है, ताकि हम असहिष्णुता को जीरो टॉलरेंस कर सकें। साथियों बात अगर हम सहिष्णुता के अर्थ को समझने की कोशिश करें तो करें तो सहिष्णुता में सह अस्तित्व का भाव विद्यमान होता हैं। सकारात्मक अर्थ में सहिष्णुता का आशय है उन विचारों, मतों या धर्मों आदि के अस्तित्व को भी स्वीकार करना तथा उनका सम्मान करना चाहे उसके विचार/मत/धर्म आपसे भिन्न हो सामाजिक समरसता और भाईचारे को बढ़ाने के लिए सहिष्णुता की अवधारणा का होना आवश्यक हैं। बुद्ध के पंचशील सिद्धांतों और नेहरू की पंचशील में सहिष्णुता की अवधारणा को ही प्रस्तुत किया गया हैं। सहिष्णुता का महत्वपूर्ण आधार लोकतांत्रिक दृष्टिकोण हैं,सहिष्णुता का प्रमुख संदर्भ धार्मिक सहिष्णुता से हैं विशेषकर भारत के सन्दर्भ में जहाँ अनेक धर्मों का अस्तित्व है वहां इसकी विशेष आवश्यकता हैं। भारत की पंथनिरपेक्षता की अवधारणा में विभिन्न धर्म, विचार और संस्कृतियों के प्रति सहिष्णुता के स्थान पर धार्मिक संदर्भ में सर्वध समभाव की अवधारणा को प्रसारित किया जिसमें विभिन्न धर्मों के सहअस्तित्व के साथ साथ सहभागिता का भाव विद्यमा हैं।
साथियों बात अगर हम इसे हर वर्ष मनाने की करें तो, हर साल 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्‍णुता दिवस मनाया जाता है। देश और दुनिया में लगातार उपद्रव, हिंसा, रंगभेद, जातिभेद, आगजनी की घटनाएं बढ़ रही है, तो मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। ये निम्न कारण देश दुनिया के विकास के रुकावट का कारण बन रहे हैं। विकासशील देश से विकसित देश बनना है तो इन सभी से परे सोचना होगा। इन सभी परिस्थितियों के बीच इंसानियत को बचाने, शांति और सौहार्द को कायम रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस पर यूनेस्‍को द्वारा लोगों को टॉलरेंस के खतरों के बारे में अधिक से अधिक जागरूक किया जाता है। आज के वक्त में कॉर्पोरेट ऑफिस में राजनीतिक क्षेत्र में इस तरह की दूरियों को मिटाने के लिए सामाजिक जिम्मेदारी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है सांस्कृतिक विविधता और शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएं। अधिक से अधिक लोगों को प्राथमिक शिक्षा का हक मिलें। जिस पर देशभर के बड़े-बड़े नेताओं को एक छत के नीचे बैठकर जरूर विचार-विमर्श करना चाहिए। यूनेस्को ने वर्ष 1995 में महात्मा गांधी की 125 वीं जयंती के अवसर पर सहिष्णुता और अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को- मदनजीत सिंह पुरस्कार की स्थापना की थी। यह पुरस्कार विज्ञान, कला, संस्कृति अथवा संचार के क्षेत्र में सहिष्णुता और अहिंसा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए काम के लिए दिया जाता है। सहिष्णुता और अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को- मदनजीत सिंह पुरस्कार का शीर्षक है और सहिष्णुता और अहिंसा की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैज्ञानिक, कलात्मक सांस्कृतिक या संचार क्षेत्रों में महत्वपूर्ण गतिविधियों कोपुरस्कृत करता है। यह हर दो साल में 16 नवंबर को दिया जाता है।जिसमें एक लाख डॉलर का पुरस्कार दिया जाता है।
साथियों बात अगर हम इसके इतिहास की करें तो, साल 1995 में यूनेस्को द्वारा सहिष्णुता दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। 1996 में इस दिवस को मनाने के लिए यूनेस्को ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को आमंत्रित किया। इसके बारे में जागरूकता फैलाने, सौहार्द की भावना पैदा करने के लिए एक अभियान जारी किया। जिसका नाम दिया टुगेदर। जिसका उद्देश्य लोगों के बीच आ रही सामाजिक दूरियों को कम करना और देशों, समुदायों और प्रवासियों के बीच मजबूती पैदा करना। इसके बाद से हर साल 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाया जाता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस 16 नवंबर 2022 तक विशेष है।आओ मिलकर सहिष्णुता के भाव को मजबूत करें।सहिष्णुता हमारी दुनिया की संस्कृतियों की समृद्ध विविधताअभिव्यक्ति के रूपों और मानव होने के तरीकों का सम्मान, स्वीकृति और प्रशंसा है जो सराहनीय थीम है।

*-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र*

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

सोचिये चैटजीपीटी पर; कितने खतरे, कितने अवसर| chat GPT par kitne khatre kitne avsar

February 19, 2023

 सोचिये चैटजीपीटी पर; कितने खतरे, कितने अवसर। जब भी कोई नया अविष्कार या तकनीक आती है तो उसको लेकर तमाम

आध्यात्मिकता जीवन का आधार है

February 16, 2023

जब हम जग मे आए जग हसां हम रोए।ऐसी करनी कर चलो हम जाए जग रोए ।। आध्यात्मिकता जीवन का

पशु चिकित्सा को चिकित्सा की जरूरत

February 16, 2023

पशु चिकित्सा को चिकित्सा की जरूरत सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाना बहुत जरूरी है।

कविता: भारतीय संस्कृति में नारी | bharatiya sanskriti me naari

February 16, 2023

 भावनानी के भाव कविता:भारतीय संस्कृति में नारी  भारतीय संस्कृति में नारी  लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती है समय आने

मेहनत की सिसकियाँ, नक़ल माफिया और राजनीतिक बैसाखियाँ

February 16, 2023

मेहनत की सिसकियाँ, नक़ल माफिया और राजनीतिक बैसाखियाँ नकल विरोधी कानून सरकार की एक अच्छी पहल है परंतु इसमें एक

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

February 16, 2023

 भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

PreviousNext

Leave a Comment