Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Inshaniyat ki ummid by Jitendra Kabeer

 इंसानियत की उम्मीद कितने लोग हैं… जो सड़क पर पड़े पत्थर नजर आने पर उन्हें उठाकर एक तरफ कर देते …


 इंसानियत की उम्मीद

Inshaniyat ki ummid by Jitendra Kabeer

कितने लोग हैं…

जो सड़क पर पड़े पत्थर नजर आने पर

उन्हें उठाकर एक तरफ कर देते हैं

ताकि उसके कारण कोई दुर्घटना न घटे।

कितने लोग हैं…

जो राह में आ रही कंटीली झाड़ियों को

हटा कर एक तरफ़ कर देते हैं

ताकि वो किसी राहगीर को न चुभे।

कितने लोग हैं…

जो दुर्घटना में घायल हुए किसी इंसान को

उठाकर अस्पताल पहुंचा देते हैं

ताकि किसी तरह से उसकी जान बचे।

कितने लोग हैं…

जो किसी मजलूम पर अत्याचार होता देख

अत्याचारी का भरसक विरोध कर देते हैं

ताकि उसका पीड़ा कुछ हद तक बंटे।

कितने लोग हैं…

जो बिना किसी आशा के गुमनाम रहकर

किसी जरूरतमंद को सहारा देते हैं

ताकि वो भी सम्मानपूर्वक जिंदगी जिए।

बहुत कम लोग हैं ऐसे

लेकिन यही कुछेक लोग सभ्य समाज के

मूल्यों को जीवनदान दे देते हैं

ताकि यह दुनिया रहने लायक जगह बने।

                                   जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति- अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

khwab kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

 ख्वाब गहरी नींद में खो गये थे, बंद आँखो ने संजोए ख्वाब। बहुत गहन रात्रि थी तब, घर की चार

Bada dil sabke pas nhi hota by Jitendra kabir

July 19, 2021

 बड़ा दिल सबके पास होता नहीं अपनी जरूरत से बढ़कर पैसा होता है बहुतों के पास लेकिन किसी जरूरतमंद की 

Berojgari by dr indu kumari

July 19, 2021

 बेरोजगारी  बेरोजगारी के मार से  युवा दल बेहाल है।  जितने भी है रोजगार  योजना से नेता गण निहाल है।  जनता

Thor Kavita by R.S. meena

July 19, 2021

ठोर बेटियों पर अत्याचार, चारों तरफ हैं फैलें ठोर । जाहिलों को विद्वान, तो विद्वानों को समझे ठोर ।। रक्षा

Murdo ki basti by R.S. meena

July 19, 2021

मुर्दों की बस्ती जुल्म करना तो यहाँ ,हैवानों की मस्ती हैं । मिटा दे खानदान को, वो बड़ी हस्ती हैं

Barish by satish samyak

July 19, 2021

बारिश हे बारिश  बार बार मत आया कर । जब जब  तुम आती हो  तब बंद हो जाता है  धयाड़ी

Leave a Comment