Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Insan ke bhesh me shaitan by Jitendra Kabir

 इंसान के भेष में शैतान हमारा समाज भरा पड़ा है ऐसे लोगों से  जो सोशल मीडिया पर जमकर देते हैं …


 इंसान के भेष में शैतान

Insan ke bhesh me shaitan by Jitendra Kabir

हमारा समाज भरा पड़ा है

ऐसे लोगों से 

जो सोशल मीडिया पर जमकर देते हैं

दूसरों को मां-बहन की गालियां,

अपने विरोधियों की बहन-बेटियों के लिए 

निकलती हैं उनके मुख से 

बहुत बार दुष्कर्म की धमकियां,

कम हैं यहां पर जिस तरह से संभावनाएं 

इन कृत्यों के लिए उन्हें सजा मिलने की,

भविष्य में मौका मिलने पर हो सकते हैं ऐसे लोग 

बड़ी आसानी से संभावित दुष्कर्मी।

हमारा समाज भरा पड़ा है

ऐसे लोगों से

जिनके दिलों-दिमाग में अरसे से दबी हैं

दूसरे धर्म और जाति के लिए

नफरत व घृणा की चिंगारियां,

सामान्य बातों को भी आए दिन

सांप्रदायिकता का रंग देकर वो लोग

बहुतों के लिए खड़ी करते हैं परेशानियां,

ऐसे लोग सत्ता के शिखर पर पहुंच जाएं

जिस देश में गलती से भी,

तो अंदरूनी एजेंडा रहता है उनका

वैमनस्य फैला दूसरों को दबाने का ही,

बेशक जनता के सामने बोलें वो कुछ भी।

                                     जितेन्द्र ‘कबीर’

                                     

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कलियुग का रामराज्य- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

कलियुग का रामराज्य शालीनता भगवान राम का गुण थालेकिन उनकी धरती पर रामराज्यसोशल मीडिया पर दिन-रात गंदी अश्लील गालियांबकने वाले

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है- जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

February 24, 2022

तुम्हारा प्रेम मेरी दुनिया है तुम्हारा प्रेम…मेरे लिए पुल सरीखा है,जिस पर चलकरनिकल जाता हूं मैं अक्सरखोजने प्रेम के गहनतम

करे कोई और भरे को- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 24, 2022

करे कोई और भरे को खूब मुनाफा कमायाजिन लोगों नेअंधाधुंध खनन करकेनदियों और पहाड़ों में,इसके कारण हुएप्रकृति के कोप से

अपनी व्यथा किसे सुनाएं

February 24, 2022

अपनी व्यथा किसे सुनाएं अपनी व्यथा किसे सुनाऊं बात समझ ना आई दुखों का पहाड़ टूटा घर में वीरानी छाई

कविता मैं बहुत खुश था

February 24, 2022

कवितामैं बहुत खुश था मैं बहुत ख़ुश था जब मेरे माता-पिता बहन हयात थे मुझे कोई फ़िक्र जिम्मेदारी चिंता नहीं

Sundar bachpan Raunak Agrawal

February 17, 2022

सुंदर बचपन !! सोनी सी मुस्कान है वो, हर माँ की जान है वो !!ये बच्चे मन के सच्चे,थोड़े कच्चे

Leave a Comment