Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

idhar awaze bahut hai by prem prakash uttrakhand

इधर आवाजें बहुत हैं ——- चलते-फिरतेउठते-बैठतेखाते-पीतेसोते-जागतेअंदर-बाहरऊपर-नीचेइधर-उधरशायद बसासत है इन्सान रहते होंगे। क्यों…?आवाजें नही होतीखग,परिन्दोंकीट-पतंगोपेड़-पौधोंफल-फूलोंजानवरों की।या नही होती हैंगिरते झरने, बहती …


इधर आवाजें बहुत हैं ——-

idhar awaze bahut hai by prem prakash uttrakhand

चलते-फिरते
उठते-बैठते
खाते-पीते
सोते-जागते
अंदर-बाहर
ऊपर-नीचे
इधर-उधर
शायद बसासत है
इन्सान रहते होंगे।

क्यों…?
आवाजें नही होती
खग,परिन्दों
कीट-पतंगो
पेड़-पौधों
फल-फूलों
जानवरों की।
या नही होती हैं
गिरते झरने, बहती नदिया
ठहरे समन्दर की।
पानी बजता तो है
मगर आवाज नही होती है
ताल-तलैया, सरोवरों की।

पहाड़ो की, गलेशियरों की
हवा, बादलों की
बारिश के पानी की बूदों की।

आवाज
पूर्णिमा का चांद
अमावस की रात
की भी होती हैं।

आवाज नही हैं
संगीत नही हैं
क्रंदन नही है
गुंजन नही है
नाद नही
अनुनाद नही हैं।
शून्य है
पर शिखर नही हैं
आदि-अंत दोनों हैं
चीख, पुकार सब है

दब गयी हैं ?
इंसानी आवाजों के तले।
प्रयास बदस्तूर जारी हैं अभी भी
इंसानी बस्तियों में
क्योकि….
इधर आवाजें बहुत हैं।

प्रेम प्रकाश उपाध्याय ‘नेचुरल’
पिथोरागढ़, उत्तराखंड
(रचनाकार,लेखक,विज्ञान प्रचार -प्रसारक,स्वतंत्र लेखन,शिक्षण,समाज सुधारक)


Related Posts

हाजिर जवाबी अटल बिहारी- डॉ. इन्दु कुमारी

December 27, 2021

हाजिर जवाबी अटल बिहारी देश की माटी ने दी सदाअमूल्य तोहफ़ा निशानीवीरता के परचम कोलहराते रहे हैं बलिदानी उन्हीं श्रेणी

रणछोड़ – डॉ. इन्दु कुमारी

December 27, 2021

शीर्षक -रणछोड़ जिस बातों की है वियोगछोड़ कर भागा रणछोड़ढूँढती है नैना तुझकोभूल गए सलोने मुझको वेदना हमें मिले उपहारक्या

बिकते – बहकते वोटर- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

बिकते – बहकते वोटर लोकतंत्र में… वोट के अधिकार के लिएकिसी योग्यता या मेहनत कीजरूरत नहीं पड़ती,बस पैदा होना ही

नंबर आएगा सभी का- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

नंबर आएगा सभी का कत्ल नहीं हुआ अब तक हमारा धर्म मानने वालों में से किसी का,हमारी जाति में से

कोई कुछ साथ न ले जा पाया- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

कोई कुछ साथ न ले जा पाया रिश्वतें देकर रुपयों-पैसों,कीमती धातुओं, हीरे-जवाहरात की,दिन-रात स्तुति गान में रमे रहकर,सौदे बहुत किये

साड़ी- सुधीर श्रीवास्तव

December 27, 2021

साड़ी साड़ी सिर्फ़ परिधान नहींस्त्री गौरव की भी शान हैसाड़ी विश्व में भारतीय नारियों कामान सम्मान स्वाभिमान है। साड़ी में

Leave a Comment