Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Hunkar rasvanti ke praneta by Dr. indu kumari

 हुंकार रसवंती के प्रणेता पैनी दृष्टि पहुँची पहले ऐसे थे रवि कालजयी रचनाएं धूमिल न होगी चमके चाँद सितारे मलिन …


 हुंकार रसवंती के प्रणेता

Hunkar rasvanti ke praneta by Dr. indu kumari

पैनी दृष्टि पहुँची पहले ऐसे थे रवि

कालजयी रचनाएं धूमिल न होगी

चमके चाँद सितारे मलिन न होगी

साहित्य जगत के जीवंत हस्ताक्षर

इनकी ना मिटने वाली शब्दाक्षर है

अंग्रेज भी कांपते  कलम हुंकार से

गूंजती भारतभूमि जयजयकार से

सत्त में संकोच न धरते अपनों’ से

हुई चीन से हा सिर झुके घूटनों में

बिहार के बागों के दिनकर लाल

टैगौर गाँधी मा्र्क्स रूप इकबाल

जन कवि का दर्जा सहज मिले

माटी की सुगंध सर्वत्र है  फैले

राष्ट्रभक्ति बसी थी नस-नस में

फिजाएं आहत थी तन मन में

समाज में चेतना का अलख 

जगाया रसवंती का कर संचार

प्रेम सौहार्द का भंगिमा फैलाया

ऐसे स्नेही विरले ओजी सपूत

दिनकर जयंती पर सादर नमन

      स्व रचित

डॉ.इन्दु कुमारी

              हिन्दी विभाग

               मधेपुरा बिहार


Related Posts

मेरी शब्दों की वैणी

September 4, 2022

मेरी शब्दों की वैणी यादों के भंवर में डूब कर मैं अकसर मोतियन से शब्द लातीबगिया शब्दों कि मेरी जहां

गुरुवर जलते दीप से(शिक्षक दिवस विशेष)

September 4, 2022

गुरुवर जलते दीप से दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब

आई पिया की याद..!!

September 1, 2022

आई पिया की याद..!! मन मयूर तन तरुण हुआबरखा नें छेड़े राग।गरज गरज घन बरस रहेआई पिया की याद।। छानी

बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन

September 1, 2022

बस्ते के बोझ से दबा जा रहा बचपन नन्हीं सी पीठ पर बस्ते का बोझ हैदब रहा है बचपन लूट

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले

September 1, 2022

गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकाले गर मुश्किलों में रखकर तूँ कोई हल निकालेजो टूट मैं गया तो

कविता – मोहन

September 1, 2022

कविता – मोहन मोहन! मुरली से प्रीत तुम्हारीअगाध अनन्त हुई कैसेप्रीत में पागल मीराबाईमन से सन्त हुई कैसे राधा ने

PreviousNext

Leave a Comment