हिन्दी तू साहिल
हमारी आत्मा है भाषा
शहद सी मीठी है भाषा
भावों की है अभिव्यक्ति
त्रिभाषा में विविध शक्ति
हमारी हिन्दी बोली खड़ी
लगी सब भाषा की लड़ी
इनसे बढ़ते शब्द भंडार
विविधता में प्यार मनुहार
एकता के सूत्र में बाँधकर
ला बाँधा प्रेम की डोरी से
हिन्दी है राष्ट्र की शान
हमें इन पर है अभिमान
विचार संस्कृति की वाहक
समृद्धि की संवाहक है
वजूद हमारी ये हिन्दी है
हिन्दी ही हमारी है मैया
जिन्दगी जगत में तैरने
वाली एक मात्र है नैया
भाव करती इसमें श्रृंगार
तू साहिल औ मैं पतवार
डॉ इन्दु कुमारी
हिन्दी विभाग
मधेपुरा बिहार
