Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, lekh

Hindi maathe ki bindi lekh by Satya Prakash

हिंदी माथे की बिंदी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, साक्षर से लेकर निरीक्षर तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति हिंदी को …


हिंदी माथे की बिंदी

Hindi maathe ki bindi lekh by Satya Prakash

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, साक्षर से लेकर निरीक्षर तक भारत का प्रत्येक व्यक्ति हिंदी को बोल सकता है तथा समझ सकता है ।14 सितंबर 1949 का दिन भारतीयों के लिए गर्व का क्षण था जब संविधान सभा ने हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता प्रदान किया।परंतु कुछ गैर हिंदी भाषी राज्यों ने इसका जमकर विरोध भी किया।हिंदी के सर्वत्र विकास के लिए आज वर्तमान समय में हिंदी दिवस, हिंदी पखवारा दिवस मनाया जाने लगा ।पखवारा दिवस मनाना इस बात को पूर्ण प्रमाणित करता है कि आज हिंदी दोयम दर्जे की भाषा बन कर रह गई है। सर्वप्रथम 1918 में महात्मा गांधी  जी ने हिंदी को राजभाषा बनाने की बात कही थी परंतु हिंदी माथे की बिंदी 24 सितंबर 1949 को ही बन पाई ।हिंदी के उद्भव और विकास को हम देखें तो सर्वप्रथम वैदिक युग में संस्कृत भाषा का वर्चस्व रहा जो क्लिष्ट भाषा होने के कारण आमजन को कम समझ में आती थी ।छठवीं शताब्दी तक आते-आते पाली और प्राकृत भाषाओं में लोक भाषा के रूप में अपनी उपस्थिति जनमानस में दर्ज कराई इसके बाद अपभ्रंश भाषा का विकास हुआ हिंदी के बारे में कहा जाता है किया यह कैसी भाषा है जिसका जन्म तो अपने घर में हुआ लेकिन नामकरण पड़ोसी ने कर दिया। हिंदी शब्द की उत्पत्ति फारसी भाषा से हुई है ।संस्कृत भाषा की उत्तराधिकारी माने जाने वाली हिंदी आज प्रत्येक कार्यालय में अपने जन्म के लिए संघर्ष करती हुई दिखाई पड़ रही है। वही मुगल काल में फारसी साहित्य का अत्यधिक तेजी से विकास हुआ जो मुगलों की राजभाषा बन गई। फारसी भाषा पश्चिमी एशिया के  सभ्य लोगों की भाषा के रूप में लोकप्रिय हो गई। धीरे धीरे उर्दू साहित्य का भी विकास हुआ आधुनिक उर्दू शायरी के जन्मदाता वली दकनी को माना जाता है जिन्होंने उर्दू साहित्य को एक अलग पहचान दिलाया। भारतेंदु युग में खड़ी बोली का विकास होने के साथ-साथ हिंदी भाषा को एक अलग पहचान मिली। वर्तमान युग में हम सभी का पुनीत कर्तव्य बनता है हिंदी भाषा के उन्नयन के लिए सकारात्मक लेखनी के माध्यम से कार्य करें।

मौलिक लेख 

सत्य प्रकाश सिंह केसर विद्यापीठ इंटर कॉलेज प्रयागराज 

उत्तर प्रदेश 


Related Posts

कोविड संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है covid crisis is not over yet

December 22, 2022

कोविड संकट अभी ख़त्म नहीं हुआ है  दुनिया के कई देशों में फ़िर तेजी से फैल रहे विस्फोटक कोविड-19 वेरिएंट

रिलेशनशिप में बोले जाने वाले ये झूठ तोड़ देते हैं दिल

December 22, 2022

रिलेशनशिप में बोले जाने वाले ये झूठ तोड़ देते हैं दिल कोई आप से पूछे कि रिलेशनशिप में सब से

सरपंचपति खत्म कर रहे महिलाओं की राजनीति

December 22, 2022

सरपंचपति खत्म कर रहे महिलाओं की राजनीति सरपंच पति प्रथा ने महिलाओ को पहले जहा थी वही लाकर खड़ा कर

भारत के राज्यों और ज़िलों का सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 जारी

December 22, 2022

भारत के राज्यों और ज़िलों का सामाजिक प्रगति सूचकांक 2022 जारी सामाजिक प्रगति सूचकांक (एसपीआई) 2022 यह रिपोर्ट राज्य और

क्या आरटीआई अधिनियम अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है?

December 20, 2022

क्या आरटीआई अधिनियम अपने उद्देश्य को पूरा कर रहा है? सरकार से पर्याप्त धन प्राप्त करने वाले कई निकायों के

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामले।

December 20, 2022

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों में आत्महत्या के बढ़ते मामले। जब तक देश की परीक्षा संस्कृति से इस

PreviousNext

Leave a Comment