Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Hindi ki mahanta by dr uma singh baghel

 हिन्दी की महानता ,  हिन्द हमारी हिन्द की भाषा , हम इसके बासी हैं , मातृभूमि के चरणों में अर्पित, …


 हिन्दी की महानता , 

Hindi ki mahanta by dr uma singh baghel

हिन्द हमारी हिन्द की भाषा ,

हम इसके बासी हैं ,

मातृभूमि के चरणों में अर्पित,

हम इसके आभारी हैं ,

तन मन में छाया हिन्दी ,

मन मन्दिर में राग है ,

हर काया को भाया हिन्दी ,

हम सबका मनमीत हैं,

देश देशांचल ने माना हिन्दी ,

हर पग पग में  इसका शौर है ,

कागज की भरपायी हिन्दी ,

देवनागरी लिपि कहलाई हिन्दी ,

बच्चा बच्चा की बोल हिन्दी ,

गली गली में शौर हिन्दी ,

राष्ट्र की बुनियाद है हिन्दी ,

अन्तर्राष्ट्रीय प्रभाव है हिन्दी ,

हिन्द फौज की आवाज है हिन्दी ,

हम सब की पुकार है हिन्दी …..

-डॉ उमा सिंह बघेल


Related Posts

Manmohna by dr indu kumari

July 11, 2021

 मनमोहना            मनमोहना इतना बता . तू कहां नहीं हो             

Kaun kiske liye ? by jitendra kabir

July 11, 2021

 कौन किसके लिए? इस देश में जनता, जो वोट देती है अपनी बेहतरी के लिए, सहती है उसके बाद तमाम

Harna mat man apna by jitendra kabir

July 11, 2021

 हारना मत मन अपना कारोबार अथवा नौकरी में आ रही परेशानियों से हार मत बैठना कभी मन अपना, धीरज से

Barsati sawan by antima singh

July 11, 2021

कविता- बरसाती सावन देखो! बादल व्योमांश में घनघोर घिर उठे हैं, वन मयूरों के पंखों के पोर खिल उठे हैं,

Budhati aakho ki aash by jitendra kabir

July 11, 2021

 बुढ़ाती आंखों की आस लाखों – करोड़ों रुपयों की लागत में बनी आलीशान कोठी में, बीतते समय के साथ बुढ़ाती

sabhya samaj ki darkar by jitendra kabir

July 11, 2021

 सभ्य समाज की दरकार “हमें क्या लेना दूसरों के मामलों में पड़कर” ऐसा सोचकर जब जब हमनें देख कर अनदेखा

Leave a Comment