Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veerendra Jain

Hindi Divas par kavita

मातृभाषा हिन्दी भाषा कोई भी हो चाहे वो अंग्रेजी या फ्रांसीसी ,जब भी बोली जाती है आधार बनाएगी हिन्दी,अक्षर क्षर …


मातृभाषा हिन्दी

भाषा कोई भी हो चाहे वो अंग्रेजी या फ्रांसीसी ,
जब भी बोली जाती है आधार बनाएगी हिन्दी,
अक्षर क्षर क्षर हो जाएं पर हिन्दी रहती अक्षरणीय,
सारी भाषाओं की ध्वनियों का विज्ञान है ये हिन्दी !!!

केवल राष्ट्र की भाषा ही न राष्ट्र का गौरव है हिन्दी
मन को मोहित करने वाली सुमन सौरव है हिन्दी
भक्ति की स्वर लाहिरी सी, सुगंधित धूप लोभान जैसी
भोर भए नभ में खग वृन्दों का कलरव है हिन्दी!!

भाषा की नैसर्गिकता से पहचान कराती है हिन्दी
भारत की समृद्ध विरासत का ज्ञान कराती है हिन्दी,
अलंकार,रस,छंदों संग काव्यों में अमृत घुलता है
विश्व में हिन्दी भाषी को सम्मान दिलाती है हिन्दी!!

सारे विश्व की भाषाओं को ध्वनि प्रदान करने वाली भारत की भाषा “हिन्दी” को कोटि कोटि नमन वंदन अभिनंदन…
आप सभी को हिन्दी दिवस की अनंत बधाई और शुभ कामनाएं…
हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है,इस पर गर्व कीजिए..
हिन्दी बोलिए, हिन्दी लिखिए..

#हिन्दी_दिवस_२०२३

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13


Related Posts

जरा सोचो इंसान – मईनुदीन कोहरी”नाचीज बीकानेरी”

January 25, 2022

जरा सोचो इंसान अपनी जुबां से किसी को कभी ना सताना।मौत भी आकर कहे तो बहाना ये बनाना।।सम्भल कर कदम

माँ का आँचल- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

कविता -माँ का आँचल माँ एक बार फिर से मुझको,आँचल ओढ़ के सो जाने देबचपन की यादें ताज़ा हो जाएँ

अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

अक्ल पर पत्थर मढ़े जाएं दुनिया में लोगों ने पहलेअपनी – अपनी आस्था के अनुसारमंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारेऔर भी नाना

शीत लहर – डॉ. इन्दु कुमारी

January 25, 2022

शीत लहर है बड़ी शबाब परहाड़ कंपाने वालीअमीरों की कुछ नहै बिगाड़ने वालीगरीबों की झोपड़ीमें सनसनी फैलानेधाक जमाने वालीआहत करने

चाँद और मैं- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 25, 2022

चाँद और मैं अमावस की काली रातों मेंउलझी हुई कई बातों मेंन पूछ! किस तरहा रहते हैंचाँद और मैं एक

अंजान राहें!- अनिता शर्मा

January 25, 2022

अंजान राहें!! है अंजान राहें थमती नहींनित नये रास्ते मिलते ही जायें।जीवन डगर पर मुस्कान बिखेरीबढ़ते चले हैं बाधाओं से

Leave a Comment