Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, lekh

Hindi divas 14 september lekh by Mamta Kushwaha

हिन्दी दिवस-१४ सितम्बर   जैसा की हम सभी जानते है हिन्दी दिवस प्रति वर्ष १४ सितम्बर को मनाया जाता हैं …


हिन्दी दिवस-१४ सितम्बर

Hindi divas 14 september lekh by Mamta Kushwaha

  जैसा की हम सभी जानते है हिन्दी दिवस प्रति वर्ष १४ सितम्बर को मनाया जाता हैं । सबसे पहले महात्मा गांधी जी ने सन् १९१८ में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की पहल की थी, उसके बाद काफी विचार- विमर्श के बाद भारतीय संविधान में १४ सितम्बर १९४९ को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया और १९५३ से लागातार हिंदी दिवस पूरे भारत में १४ सितम्बर को मनाया जाता है ताकि हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार हो सके और भारतीय संविधान के भाग १७ के अनुच्छेद ३४३(१) के तहत हिन्दी को राज भाषा और लिपि देवनागरी को स्विकृत किया गया । 

‌ १४ सितम्बर को पूरे देश में ,स्कूल, कालेज, विभिन्न जगह पर सांस्कृतिक सभा आदि का आयोजन किया जाता है तथा हिंदी संबंधित भिन्न- भिन्न प्रतियोगिता भी आयोजित किया जाता है एवं हिंदी भाषा के प्रति लोगों में रूचि बढ़ाने एवं व्यवहार करने में जागरूक किया जाता है

 हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार में मैथिलीशरण गुप्त, रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, भारतेंदु आदि साहित्यकार ने अहम योगदान दिया है, हिन्दी दिवस के अवसर पर इतना ही कहना चाहती हूँ, हिंदी हमारी राजभाषा आज के दौर में हिंदी को पहले आम बोलचाल के रूप में अधिक बार किया जाता है परंतु आज भी हिंदी को लोग कुछ लोग गवार भाषा समझते हैं और अंग्रेज़ी को प्राथमिकता हैं परंतु हिंदी भाषा लिखने पढ़ने में हमने अपने आप एक गर्व की बात हैअब देश विदेश में भी हिंदी भाषा की चर्चा है इसका व्यवहार हो रहा है इसे बोलने में कतई हिचकिचाना नहीं चाहिए बल्कि इसका ज्यादा से ज्यादा व्यवहार करना चाहिए हिंदी भाषा के लिए प्रस्तुत मेरी निम्नलिखित पंक्तियां –

‌ हिंदी है हमारी मातृभाषा 

‌करो सामान इसका सदैव 

‌ना कतराओ इसे बोलने में

‌ना कतराओ इसे लिखने में 

‌लगाओ इसमें गर्व की बिंदी

‌ क्योंकि हिंदी हमारी मातृभाषा । 

‌ -ममता कुशवाहा
पिपरा असली, मुजफ्फरपुर, बिहार


Related Posts

नई सोच नई एप्रोच

March 6, 2023

नई सोच नई एप्रोच आज का भारत तेज़ सोचता है, दूर की सोचता है और तुरंत फैसले लेता है भारत

विज़न 2047 – आकांक्षा 47 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था

March 6, 2023

 विज़न 2047 – आकांक्षा 47 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था  एशिया आर्थिक संवाद के सातवें संस्करण 23-25 फ़रवरी 2023 में दिखा भारत

अपराध और अपराधियों के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति ज़रूरी

March 6, 2023

डर अच्छा लगता है अपराध और अपराधियों के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति ज़रूरी बुलडोज़र, इनकाउंटर, त्वरित एक्शन के डर ने

क्यों झेल रही निराशा, स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा?

March 6, 2023

क्यों झेल रही निराशा, स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा? आशा कार्यकर्ता अपने निर्दिष्ट क्षेत्रों में घर-घर जाकर बुनियादी पोषण, स्वच्छता प्रथाओं और

आधुनिकता वरदान या अभिशाप

March 5, 2023

 आधुनिकता वरदान या अभिशाप प्रगति सब ही क्षेत्र में आवकारदाय है।प्रहलें हम पैदल या बैल गाड़ियों,घोड़ा गाड़ियों आदि में प्रवास

हमे सुंदर घर बनाना तो आता है, पर उस घर में सुंदर जीवन जीना नहीं आता

March 5, 2023

J. krishnamurti  हमें सुंदर घर बनाना तो आता है, पर उस घर में सुंदर जीवन जीना नहीं आता बीसवीं सदी

PreviousNext

Leave a Comment