Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

He narayan par lga do by vijay Lakshmi Pandey

 हे !नारायण  पार  लगा  दो …!! रे ! रँगरेज  मोरी  चुनर रंग दे , धानीं   चटख   गुलाबी    में । …


 हे !नारायण  पार  लगा  दो …!!

He narayan par lga do by vijay Lakshmi Pandey

रे ! रँगरेज  मोरी  चुनर रंग दे ,

धानीं   चटख   गुलाबी    में ।

पीत  बसन्ती  अँचरा  रंग  दे,

जरदोज़ी,  लाल किनारी में।।

रे !  माली मोरे गजरा चुन दे,

गेंदा ,      चंपा   ,जूही    में ।

मैं   मदमारी    मैं  मतवारी  ,

पिया  मिलन  को जाऊँ मैं ।।

पँचतोरिया वह पहिरि चुनरी,

चादर   चमक   निराली  मैं।

तुम  तो    मेरे  परम्  सनेही ,

कारीगरी     तुम्हारी     मैं ।।

रे ! दरपन तुम साँच बताना ,

काहे    भई     पराई    मैं  ।

तुम  तो  बड़े  सयाने  मेरे ,

फिरती   मारी – मारी  मैं  ।।

मुझ पर धूल जमीं बरसों से,

कसक मिलन की बाक़ी मैं ।

निखर रही दिन -दिन मैं प्रियतम,

यौवन    की      तैयारी    मैं ।।

अब  तो नज़र टिकी है तुम पर,

पा   जाऊँ ,    बड़भागी     मैं ।

थोड़ा   सा  अवसर  ही माँगू ,

चरणों    की    अनुरागी  मैं ।।

साँच कहे यह “विजय” विरह में,

अब  तो    कृपा   तुम्हारी  मैं  ।

हे  !   नारायण  पार  लगा दो ,

नैया  भारी  ,      भारी     मैं ।।

हे ! नारायण  पार  लगा  दो ।

नैया  भारी ,     भारी     मैं  ।।

               विजय लक्ष्मी पाण्डेय

               एम. ए., बी.एड.(हिन्दी)

               स्वरचित  मौलिक रचना

                       आजमगढ़, उत्तरप्रदेश


Related Posts

कविता- महिला राजनीति क्षमता निर्माण-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

December 20, 2021

कविता महिला राजनीति क्षमता निर्माण राष्ट्रीय महिला आयोग ने राजनीति में महिलाओं के लिए क्षमता निर्माण करनेशी इज ए किंग

मुबारक हो नया साल-अजय प्रसाद

December 19, 2021

मुबारक हो नया साल लो फ़िर से नया साल मुबारक हो ज़िंदगी ये खस्ताहाल मुबारक हो। बस चंद रोज की

माँ- R.S.meena Indian

December 19, 2021

कविता माँ मैं व्रत नहीं करता ,कहीं माँ जैसी सूरत नहीं । माँ बाप को भूल जाऊ,ऐसा कभी मुहूर्त नहीं

पता नही-अजय प्रसाद

December 18, 2021

“पता नहीं “ खुश हूँ मैं या खफ़ा पता नही दुआ हूँ के बददुआ पता नही । हलचल तो है

भान दक्षिणायन भए- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 18, 2021

भान दक्षिणायन भए…!!! भान दक्षिणायन भए, शिशिर सरकारी।पछुआ बयार मोहे ,तीर सम लाग्यो है ।। बिकल बौराई मैं,थर-थर बदन काँप्यो।ऐसे

मैं चटख साँवरी….!- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 18, 2021

मैं चटख साँवरी….!!! मैं चटख साँवरी, श्याम रंग मेरो..!!!मैं सज के सँवर के,जो निकलूँ ,तो क्या बात..? मैं बड़ी खूबसूरत,बड़ी

Leave a Comment