Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Harna mat man apna by jitendra kabir

 हारना मत मन अपना कारोबार अथवा नौकरी में आ रही परेशानियों से हार मत बैठना कभी मन अपना, धीरज से …


 हारना मत मन अपना

Harna mat man apna by jitendra kabir

कारोबार अथवा नौकरी में आ रही

परेशानियों से हार मत बैठना

कभी मन अपना,

धीरज से लेकर काम थोड़ा

उन्हें हल करने की कोशिश करना,

क्योंकि जरा सोचो

तुम्हारे पास कम से कम ऐसा

कुछ है तो सही,

दुनिया में बहुतों के लिए कारोबार या नौकरी

भी है एक सपना।

घर-परिवार, नाते-रिश्तेदारी में चल रही

कलह से हार मत बैठना

कभी मन अपना,

करना पड़े समझौता थोड़ा

शांति बनाए रखने को तो जरूर करना,

क्योंकि जरा सोचो

तुम्हारे पास यह सब कम से कम

हैं तो सही

दुनिया में बहुतों के पास तो घर-परिवार

ही नहीं है अपना।

जिंदगी में चल रही उथल-पुथल और

कठिनाईयों से हार मत बैठना

कभी मन अपना,

ठंडे दिमाग से सोचकर थोड़ा

इसे जीवन का ही भाग समझना,

क्योंकि जरा सोचो

तुम्हारे पास कम से कम

जीवन है तो सही

दुनिया में बहुत लोग तो कामयाब ही नहीं हो पाते

जीवन बचाने में अपना।

                                             जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

हार कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

हार! बेहतर होने का अनुभव देती हैं,यह तो सीरीफ एक परिस्थिति है,सफलता का सबसे बड़ा रास्ता होती है,कुछ देर की

21 वीं सदी की नारी-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

21 वीं सदी की नारी! उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉपकरो परीक्षा की तैयारी,कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटोअपने घर की

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन ! कोई कोई तहजीब, सलीका, अदब नहीं खोता,सर झुकाता हुआ हर शख्स बेचारा नहीं होता!

मिट्टी का कर्ज- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 मिट्टी का कर्ज खूबसूरत है नजारालग रहा है प्यारा इस मिट्टी का कर्ज हैचुकाना हमारा फर्ज  है प्यारे गगन हमें

साहिल- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 साहिल ओ मेरे मन के मीत दिल लिया क्यों जीत निश्छल है मेरी प्रीत रेजीवन की है ये रीत सदा

आह्वान- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

आह्वान मद्यपान निषेध मेरे देश के नौजवानोंतू है मौजों की रवानीहै भारत माँ के लाल वेशकीमती तेरी जवानीमद्यपान नहीं जिन्दगानीबीड़ी

Leave a Comment