Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Han mai badal rha hu by Rahul Aligadhi

 *हाँ, मैं बदल रहा हूँ …*  जी भर के जीना सीख रहा हूँ, आईने में खुद को ढूंढ रहा हूँ। …


 *हाँ, मैं बदल रहा हूँ …* 

Han mai badal rha hu by Rahul Aligadhi

जी भर के जीना सीख रहा हूँ,

आईने में खुद को ढूंढ रहा हूँ।

सीख रहा हूँ टेढ़े रास्तों का चलन,

इसलिए थोड़ा थोड़ा संभल रहा हूँ।

हाँ, मैं खुद को थोड़ा बदल रहा हूँ।। 

हिचकियाँ भी अब तो, आती नहीं है,

इस कदर कोई याद, करता नहीं है।

शान्त कर दे कोई, मेरे दिल में उठे तूफ़ां को,

मैं अंदर ही अंदर सुलग रहा हूँ।

हाँ, मैं खुद को थोड़ा बदल रहा हूँ।। 

खोल दिए बंधन सारे, जो लगे थे मेरे दिल पर,

खुलकर उड़ना चाहता हूँ, उस निश्छल से अम्बर पर।

मन में कब तक बोझ लिए, फिरूंगा मारा मारा,

हीरे जैसे मन को लेकर, फिर काँसे में ढ़ल रहा हूँ।

हाँ, मैं खुद को थोड़ा बदल रहा हूँ।।

✍️ राहुल अलीगढ़ी

परिचय ……….

नाम : *राहुल अलीगढ़ी* 

पिता : श्री चन्द्र भान सिंह

माता : श्रीमती ओमवती देवी

जन्म : 15 जुलाई 1988

सम्मान : श्री राम साधना साहित्य सम्मान, कृष्णवी साहित्य सम्मान (श्री नवमान पब्लिकेशन, अलीगढ़) एवं स्टोरी मिरर, मुम्बई से अब तक 9  प्रशस्ति पत्र प्राप्त हो चुके हैं।।

पता : प्रिंस कॉलोनी, मेलरोज़ बाईपास, अलीगढ़ -202001 (उत्तर प्रदेश)

मोबाइल : 8307778883

ई मेल : rahul.info12@gmail.com


Related Posts

फर्ज/farz

August 11, 2022

फर्ज कहां से लाए वह दिलों की तड़पजो थी भगत सिंघ ,राज्यगुरू और आज़ाद में अब तो सिर्फ बातें बड़ी

भाई बहन का रिश्ता!

August 11, 2022

भाई बहन का रिश्ता! कभी दोस्ती तो कभी लड़ाई,एक दूजे से ना बात छुपाई,मुसीबत में कभी भाई काम आया, तो

उड़े तिरंगा बीच नभ

August 11, 2022

उड़े तिरंगा बीच नभ आज तिरंगा शान है, आन, बान, सम्मान।रखने ऊँचा यूँ इसे, हुए बहुत बलिदान।। नहीं तिरंगा झुक

रक्षाबंधन विशेष

August 10, 2022

 नन्हीं कड़ी में…. आज की बात  रक्षाबंधन रक्षाबंधन है एक,अटूट निराला बंधन।रेशम की पवित्र डोर से,बना यह रक्षा का बंधन।। सब

तब और अब का अंतर!

August 5, 2022

तब और अब का अंतर! जब नहीं था हमारे पास अलार्म,स्वयं से याद रखते थे सारे काम,ना था मोबाइल फोन

जीवन की यात्रा!

August 5, 2022

जीवन की यात्रा! उम्मीद के दीए को जलाकर,दर्द और तकलीफ को भूलाकर,मुश्किलों को सुलझा कर,हिम्मत को खुद में समाकर,जीते जा

PreviousNext

Leave a Comment