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Hamare samaj ki bhedchal by Jitendra Kabir

 हमारे समाज की भेड़चाल ज्यादातर अमीर और प्रभावशाली लोग अपनी धन-संपत्ति, ऐश्वर्य-विलासिता कामयाबी, सत्ता, मशहूरी के छिन जाने की आशंका …


 हमारे समाज की भेड़चाल

Hamare samaj ki bhedchal by Jitendra Kabir

ज्यादातर अमीर और प्रभावशाली लोग

अपनी धन-संपत्ति, ऐश्वर्य-विलासिता

कामयाबी, सत्ता, मशहूरी के छिन जाने की

आशंका से ग्रस्त हो 

मानते हैं बहुत सारे ‘अंधविश्वास’

और करते हैं उनका अपने सामाजिक रूप से

खूब प्रचार-प्रसार,

ज्यादातर गरीब और मध्यमवर्गीय लोग

ऐसे लोगों के रहन-सहन, तौर-तरीकों का

अनुसरण करने की चाह में 

खोकर अपना

सुख-चैन कर लेते हैं जीवन बेकार।

                                          जितेन्द्र ‘कबीर’

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


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