Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Hal-a-dil by Mahesh Ojha

 हाल-ए-दिल हाल अपना सुनाएं हम कैसे उन्हें, वो तो ग़ैरों की महफ़िल में रमे जा रहे। एक नज़र भी ना …


 हाल-ए-दिल

Hal-a-dil by Mahesh Ojha

हाल अपना सुनाएं हम कैसे उन्हें,

वो तो ग़ैरों की महफ़िल में रमे जा रहे।

एक नज़र भी ना देखें वो मेरी तरफ़,

बेरुखी से हम उनकी मरे जा रहे।।

हाल अपना …

वो जो ख्वाबों में अक्सर सताते रहे,

दिल पे बिजली हमेशा गिराते रहे।

बन कर भानमती आज महफ़िल में हर,

प्राणघातक वो दिल पर कहर ढा रहे।।

हाल अपना …

माना कोमल हृदय उनका दिल है बड़ा,

काली नागन सी ज़ुल्फ़ें घटा है जड़ा।

कोई देखे जो जी भर उन्हें एकटक,

लुट के कंगाल हो वो खड़ा ही खड़ा।।

हाल अपना …

रूप दरपन में उनका समाता नहीं,

तन की खुशबू मधुबन खपा पाता नहीं।

होंठ ऐसे रसीले हैं मीठे शहद,

कोयल भी बोली में पार पाता नहीं।।

हाल अपना …

दिल की हसरत है उनसे कहूँ बात वो,

दबी चाहत में उलझी है जज़्बात जो।

पर ज़ुबां ना कहे जो कहे है नज़र,

बीते आग़ोश में संग कोई शाम तो।।

हाल अपना …

                            श्री महेश ओझा
                                गोरखपुर


Related Posts

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन -मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ बीकानेरी”

January 25, 2022

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन । ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन ।तुझको मेरा नमन , तुझको मेरा नमन ।। आबरू तेरी जाने नां देंगें कभी ।

दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार

January 24, 2022

भज़नदे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार बस इतनी

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में…

January 24, 2022

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में…. नन्हीं कड़ी में…. आज की बात जीना चाहता हूँ… (कविता…) मैं भी किसी के आँख का तारा

हिंदू राष्ट्र-दीप मदिरा

January 24, 2022

हिंदू राष्ट्र मैं हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं। अगर तुम देने को तैयार हो समानताकिसी को नहीं बता रहे हो

आगे बढ़ते हैं!-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

आगे बढ़ते हैं! वक्त बीत गया, समा बदल गया, चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं,दिल में लाए दया,अब और

यही कुछ फर्क है!- डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

यही कुछ फर्क है! जब नहीं था हमारे पास अलार्म, स्वयं से याद रखते थे सारे काम,ना था मोबाइल फोन

Leave a Comment