Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

Guru govind dono khade kako lagu paye by jayshri birmi

गुरु गोविंद दोनो खड़े काको लागू पाए अपने देश में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा कहा गया है। …


गुरु गोविंद दोनो खड़े काको लागू पाए

Guru govind dono khade kako lagu paye by jayshri birmi

अपने देश में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा कहा गया है। गुरु की भक्ति करी जाती थी।अर्जुन से भी एकलव्य की भक्ति थी।ऐसे तो अनेक उदाहरण है इतिहास में।स्वामी रामदास और शिवाजी महाराज, चाणक्य और चंद्रगुप्त ,कई उदाहरणों से भरा पड़ा है हमारा इतिहास।
क्या आज हम इन गुरु शिष्य के समकक्ष गुरु या शिष्य पा सकते है क्या?नही ,आज शिष्य को गुरु के प्रति सम्मान नहीं, नाहीं गुरु को सिर्फ ज्ञान देने से मतलब है,व्यवसाईक बन रही है दुनिया,जब पाठशाला में पढ़ाया जाता है तो भी ट्यूटर रखना फैशन हो गई है,स्टेटस सिंबल हो गया है। नाही गुरु को शिष्य से लगाव और शिष्य को गुरु के लिए आदर है।अपने गुरु परशुराम की निद्रा भंग न हो इसलिए कर्ण ने भंवरे का उसकी जंग को कुतर ने का दर्द सह लिया था,क्या वो आसन था?
ये एक उदाहरण है
चरणदास की दो बड़ी शिष्याये थी
अगाध प्रेम था अपने गुरु से
दयाबाई और सहजोबाई।
चरणदास सुखदेव मुनि के शिष्य थे,दीक्षा के बाद 12 साल अग्यातवास में चले गए। 12 सालबाद दिल्ली में प्रगट हुए।
दोनो शिष्यओ में एक तो उनके भाई केशवचंद की बेटी थी और सहजोबाई राजस्थान से आती थी।उसका हमेशा निवेदन रहता के गुरु उसकी कुटिया को पावन करे।
जब एक दिन गुरु ने कह ही दिया की तुम मेरी रrह देखना शुरू करो मैं कभी भी आ जाऊंगा।गुरु प्रेम में दीवानी ने अपने हाथों से आसन बुना और राह देख रही थी।
और एक दिन चमत्कार हो ही गया,एक और से भगवान सूर्यनारायण उपर आ रहे थे ,एक और से प्रभु आ रहे थे और दूसरी और से गुरु आ रहे थे।अब द्विधा ये हुई कि बैठने वाले दो और आसान एक,गुरुजी को आसन दिया और प्रभु के हाथ में पंखा रख दिया , कहा कि गुरु को हवा जलो,गर्मी बहुत है।गुरु की सेवा में परमात्मा को लगा दिया था । उन्हों ने लिखा है –राम तजु पर गुरु न विसारू, गुरु के सम हरी न निहारू।हरी ने रोग भोग उर्रजायो गुरु ने जोगी कर अबे ही छुटायो,
ऐसा लिखा है सहजोबाई ने,राम को तो मैने तस्वीरों में देखा है गुरु तो साक्षात सह शरीर देखा है।
इसे गुरु भक्ति कहते है।गुरु अपार सागर है बस गढ़ा खोद के रखो और गुरु द्वारा अर्जित ज्ञान से भर दो।
गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान बीज को बो लो,समय आने पर वटवृक्ष बन जायेगा।
शायद ये आजकल के नौ जवानों में समझ आए।

जयश्री बिर्मी
निवृत्त शिक्षिका
अहमदाबाद


Related Posts

इंसाफ़ ?-जयश्री बिरमी

December 10, 2021

 इंसाफ़ ? आज के अखबार में I कि किसान आंदोलन के दौरान किए गए मुकदमों को वापिस लेने पर सरकार

अच्छी सी नौकरी करना-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

December 9, 2021

अच्छी सी नौकरी करना!!! अगर सब अच्छी सी नौकरी करने वाले बनेंगे तो अच्छी नौकरी देगा कौन – हमें नौकरी

भारत की अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक विविधताएं और विशिष्टताएं

December 3, 2021

भारत की अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक विविधताएं और विशिष्टताएं हैं जिनका अपेक्षित सम्मान करके ही सरकारी कामकाज में हिंदी का उपयोग

देखो पहले देशहित- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

 देखो पहले देशहित हम किसी भी संस्था या किसी से भी अपनी मांगे मनवाना चाहते हैं तब विरोध कर अपनी

व्यंग -एक ओर स्वप्न- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

व्यंग- एक ओर स्वप्न नींद ही नहीं आ रही थी तो मोबाइल में इधर उधर कुछ न कुछ ढूंढ के

दुनियां की सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल डिजास्टर-जयश्री बिरमी

December 3, 2021

 दुनियां की सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल डिजास्टर भोपाल गैस त्रासदी के बारे में आज हम भूल चुके हैं क्या?१९६९ में आई

Leave a Comment