Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Guru bin gyan kavita by sudhir srivastava

 गुरु बिन ज्ञान हमारे देश में गुरु शिष्य परंपरा की नींव सदियों पूर्व से स्थापित है। इस व्यवस्था के बिना  …


 गुरु बिन ज्ञान

Guru bin gyan kavita by sudhir srivastava

हमारे देश में गुरु शिष्य परंपरा की

नींव सदियों पूर्व से स्थापित है।

इस व्यवस्था के बिना 

ज्ञान और ज्ञानार्जन की

हर व्यवस्था जैसे विस्थापित है।

माना कि हमनें विकास की सीढ़ियां

बहुत चढ़ ली है, 

मगर एक भी सीढ़ी 

हमें भी तो बता दो 

जो गुरु के बिना गढ़ ली है।

भ्रम का शिकार या 

घमंड में चूर मत हो,

धन,दौलत का गुरुर 

अपने पास ही रखो,

आँखे फाड़कर जरा 

अपने आसपास देखो।

कब,कहाँ और कैसे 

तुमनें ज्ञान पाया है?

जिसमें गुरु का योगदान

जरा भी नहीं आया है।

जन्म से मृत्यु तक 

वह समय कब आया है?

जब तुम्हारा खुद का ज्ञान 

तुम्हारे अपने काम आया है।

जिस ज्ञान पर आज इतना 

तुम इतराते हो,

ये ज्ञान भी भला तुम 

क्या माँ के पेट से लाये हो?

कदम कदम पर 

ये जो ज्ञान बघारते हो,

सोचो क्या ये ज्ञान भला 

स्वयं से ही पाये हो।

प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष हमें जीवन में 

हजारों गुरु मिलते हैं,

उनके दिए ज्ञान की बदौलत ही तो 

हमारे एक एक दिन कटते हैं।

गुरु के बिना भला 

ज्ञान कहाँ मिलता है?

गुरुज्ञान की बदौलत ही तो 

हमारा जीवन चलता है।

◆ सुधीर श्रीवास्तव

       गोण्डा, उ.प्र.,भारत

    8115285921

©मौलिक, स्वरचित,

08.07.2021


Related Posts

गीत नया गाता हूं गीत नया गाता हूं।।

October 22, 2023

गीत नया गाता हूं गीत नया गाता हूं।। 1-निश्चय निश्चित निष्छल काल दौर स्वीकारता कर्तव्य परम्परा के दायरे में सिमटना

Kavita : Virasat | विरासत

October 19, 2023

विरासत युद्ध और जंग से गुजरतेइस दौर में – सड़कों पर चलतेएंटी माइनिंग टैंकों औरबख्तरबंद गाड़ियों की आवाज़ों के बीच-

Kavita : ओ मेरी हिंदी

October 19, 2023

 ओ मेरी हिंदी मेरी हिंदी मुझे तुम्हारे अंतस् मेंमाँ का संस्कार झलकता हैक्योंकि तू मेरी माँअर्थात् मातृभाषा हैऔर मातृभाषा- मातृभूमि

Kavita on navratri

October 19, 2023

 नवरात्रि सुनो दिकु….. नौ दिन नवरात्रि केहमारे जीवन में आनंद लेकर आते हैज़िंदगी को जुमकर कैसे जिया जाता हैगरबा और

Kavita : चीन का हर माल ख़तरनाक

October 19, 2023

चीन का हर माल ख़तरनाक मैंने निजात पाया हैहर उस चीज़ पर शिवाय उसकेजो कमबख़्त चीन की डायनामाइट छछूंदर हैकितनी

शैलपुत्री

October 16, 2023

शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय के, घर बेटी एक आई। दाएं हाथ में त्रिशूल,बाएं हाथ में कमल लाई। वृषभ है वाहन इसका,इसलिए

PreviousNext

Leave a Comment